
कुर्बानी का त्यौहार बकरीद 28 मई का मनाया जाएगा. ईद की तरह से ही बकरीद भी तीन दिन तक मनाई जाती है. तीन दिन तक बकरे, भेड़ और भैंस की कुर्बानी का सिलसिला चलता रहता है. देश में सबसे ज्यादा कुर्बानी बकरों की दी जाती है. बकरों की खरीदारी में भी तेजी आ गई है. जानकारों की मानें तो इन 10 दिन में दो करोड़ से ज्यादा बकरों की खरीद-फरोख्त हो जाएगी. देशभर में जगह-जगह बकरों की मंडियां लगना शुरू हो गई हैं. 20 हजार रुपये से लेकर एक और डेढ़ लाख रुपये तक के बकरे मंडियों में बिकने के लिए आ रहे हैं.
गांवों की साप्ताहिक हाट में भी बकरों की जमकर बिक्री हो रही है. बकरीद से तीन-चार दिन पहले बकरों की खरीद में और तेजी आ जाती है. शहरी घरों में जगह कम होने के चलते अब कुर्बानी करने वाले दो-तीन दिन पहले ही बकरे खरीदते हैं. बकरीद के मौके पर देशभर में सिर्फ बकरों की बिक्री से ही पशुपालकों की जेब में 50 हजार करोड़ रुपये की रकम आ जाती है. अभी इसमे भेड़ और भैंस की बिक्री से होने वाली रकम शामिल नहीं है.
बकरा कारोबारी हाजी मोहम्मद इकबाल ने किसान तक को बताया कि मोटे तौर पर बात करें तो देश में करीब 10 फीसद मुसलमान कुर्बानी करता है. कुर्बानी में शामिल होने के लिए कुछ धार्मिक शर्त हैं. उन्हें पूरा करने के बाद ही कोई भी मुसलमान कुर्बानी कर सकता है. यही वजह है कि सभी मुसलमान कुर्बानी नहीं करते हैं. अब कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दो से तीन बकरों की कुर्बानी करते हैं.
जो और ज्यादा पैसे वाले हैं वो 5 से लेकर 10 बकरों तक की कुर्बानी करते हैं. अब कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बकरा न करके भैंस की कुर्बानी में हिस्सा ले लेते हैं. एक भैंस की कुर्बानी में 7 लोग हिस्सा लेते हैं. भैंस की कुर्बानी भी बड़े पैमाने पर होती है. उत्तर भारत में भैंस की कुर्बानी भी खूब होती है. भेड़ की कुर्बानी का चलन भी बढ़ता जा रहा है. खासतौर से जम्मू-कश्मीर और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में.
दिल्ली में जामा मस्जिखद के पास लगी मंडी में बुलंदशहर, यूपी से बकरे बेचने आए नईम अहमद ने बताया कि मंडी में आने वाला आम खरीदार सबसे ज्यादा 35 से 40 किलो वजन के बकरे की तलाश करता है. इस वजन का बकरा 20 हजार रुपये के आसपास मिल जाता है. बहुत कम लोग होते हैं जो 15-16 हजार रुपये की कीमत वाला बकरा खरीदते हैं. अब 50 और 60 किलो वजन वाले बकरे की बात करें तो 30 से 35 हजार रुपये तक में आ जाता है.
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