FMD Disease: ‘गाय-भैंस, भेड़-बकरी एक बीमारी से हर साल हो रहा 25 हजार करोड़ का नुकसान’

FMD Disease: ‘गाय-भैंस, भेड़-बकरी एक बीमारी से हर साल हो रहा 25 हजार करोड़ का नुकसान’

FMD Disease केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री के मुताबिक इस बीमारी के चलते हर साल करीब 25 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है. हाल ही में पशुओं के टीकाकरण से जुड़े एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने ये आंकड़ा बताया था. साथ ही ये जानकारी भी दी कि साल 2030 तक इस बीमारी पर कंट्रोल पा लिया जाएगा. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 23, 2026,
  • Updated Jan 23, 2026, 4:55 PM IST

बात चौंकाने और परेशान करने वाली है. चौंकाने वाली इस मायने में की गाय-भैंस और भेड़-बकरियों की एक बीमारी के चलते हर साल करीब 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान सरकार को उठाना पड़ता है. कई मौकों पर खुद केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री इस बात को कह चुके हैं. ऐसा भी नहीं है कि इस बीमारी के चलते सिर्फ भारत को ही नुकसान उठाना पड़ रहा हो. दुनियाभर के ज्यादातर देश उत्पादन करने वाले पशुओं की इस बीमारी से परेशान हैं. और ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि इस बीमारी से सिर्फ पशु ही नहीं, पशुओं के उत्पाद इस्तेमाल करने वाले इंसानों पर भी इसका खतरा मडंरा रहा है. 

पशुओं की जिस बीमारी की हम बात कर रहे हैं उसे खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) के नाम से जाना जाता है. हालांकि इस बीमारी से निपटने के लिए पशुपालन और डेयरी मंत्रालय भी एक बड़े प्लान के तहत काम कर रहा है. प्लान कामयाब होने पर देशभर में एफएमडी फ्री जोन घोषि‍त किए जाएंगे. वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की गाइड लाइन के मुताबिक पशुपालक खुद इसकी घोषणा करेंगे. जबकि डब्ल्यूएचओ पशुपालकों की इस घोषणा पर मुहर लगाने का काम करेगा. 

ऐसे हो रहा हजारों करोड़ का नुकसान 

एनिमल एक्सपर्ट एमके सिंह का कहना है कि एफएमडी जानलेवा बीमारी है. अगर ये बीमारी होने पर पशुओं की ठीक से देखभाल ना की जाए. बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी कदम नहीं उठाय जाएं तो पशु की मौत तक हो जाती है. संक्रमण रोग होने के चलते पशु शेड के दूसरे पशुओं पर भी इसका खतरा बना रहता है. इसके साथ ही पशु को ये बीमारी होने पर उत्पादन भी घट जाता है. कम दूध उत्पादन होने पर लागत भी बढ़ जाती है. क्योंकि अभी हमारा देश एफएमडी फ्री घोषि‍त नहीं हुआ है तो डेयरी प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट भी उस मात्रा में नहीं हो पाता है जितना दूध का उत्पादन है. 

मीट एक्सपोर्ट भी हुआ प्रभावित 

मीट एक्सपोर्टर का कहना है कि दुनिया का ऐसा कौनसा देश है जहां भारत का बफैलो मीट पसंद नहीं किया जाता है. बहुत सारे ऐसे देश हैं खासतौर पर यूरोपियन वो बफैलो मीट खरीदना चाहते हैं, लेकिन पशुओं में एफएमडी और ब्रूसोलिसिस बीमारी के चलते नहीं खरीदते हैं. अगर देश एफएमडी फ्री घोषि‍त हो जाता है तो फिर मीट एक्सपोर्ट भी दोगुनी रफ्तार से बढ़ने लगेगा. 

सबसे पहले 9 राज्यों में कंट्रोल होगी एफएमडी 

हाल ही में पशुओं के टीकाकरण को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस दौरान केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन समेत मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल और विभाग की सचिव अलका उपाध्याय, वर्षा जोशी, ओपी चौधरी, एनिमल हसबेंडरी कमिश्नर अभि‍जीत मित्रा भी मौजूद थे. इस मौके पर राजीव रंजन ने घोषणा करते हुए बताया कि देश में कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में सीरो-सर्विलांस के आधार पर जोन बनाने की तैयारी चल रही है. इन राज्यों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां एफएमडी टीकाकरण एडवांस स्टेज में है. 

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