Lumpy Disease: गायों के बाड़े में आज ही से अपनाएं ये एक्सपर्ट टिप्स, नहीं होगी लंपी बीमारी 

Lumpy Disease: गायों के बाड़े में आज ही से अपनाएं ये एक्सपर्ट टिप्स, नहीं होगी लंपी बीमारी 

Lumpy Disease लंपी बीमारी की सिर्फ रोकथाम ही संभव है. अभी इसका कोई इलाज नहीं है. इसी को देखते हुए पशुओं को वैक्सीन लगाई जाती है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि पशुपालन के दौरान अगर खास देखभाल के साथ कुछ ऐहतियात बरती जाए तो लंपी के असर को कम किया जा सकता है. 

पशुओं में लंपी बीमारी का खतरापशुओं में लंपी बीमारी का खतरा
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 01, 2026,
  • Updated Sep 01, 2026, 11:44 AM IST

एक बार फिर से लंपी बीमारी ने दस्तक दे दी है. पशुपालकों को अलर्ट रहने की हिदायत दी जा रही है. हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में लंपी का असर देखा जा रहा है. गायों को तकलीफ देने वाली ये एक गंभीर बीमारी है. इसके चलते गायों की मौत तक हो जाती है. जैसा कि वेस्ट यूपी से कुछ गायों के मरने की भी खबर आ रही है. ऊपर से बारिश का भी खतरा बना हुआ है. ऐसी आंशका जताई जा रही है कि 6 सितम्बर तक जोरदार बारिश हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो लंपी का वायरस और ज्यादा फैलेगा. क्योंकि बारिश में लंपी का वायरस और तेजी से एक्टिऐव होता है. हालांकि अभी तक इस बीमारी को सिर्फ वैक्सीन से ही कंट्रोल किया जा सकता है. 

या फिर जहां गाय बांधी जाती हैं वहां जरूरी साफ-सफाई रखी जाए. एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक लंपी बीमारी पशुपालकों को एक नहीं कई तरह से नुकसान पहुंचाती है. बीमार होने पर उत्पादन कम हो जाता है. इलाज पर पैसा खर्च होता है. पशु गर्भ से हो तो गर्भपात हो जाता है. पशु की मौत हो जाए तो कम से कम 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक का नुकसान हो जाता है. 

अलर्ट हो जाए और करें ये काम 

  • बीमार पशुओं को फौरन अलग कर दें. 
  • बीमार पशुओं का डाक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर दें. 
  • चार्ट के मुताबिक सभी पशुओं का समय पर वैक्सीनेशन कराएं. 
  • पशुओं के बाड़े में साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखें.
  • पशुओं के बाड़े में कीटनाशक दवाई का छिड़काव करें।
  • पशुओं के घाव हो रहे हों तो उन्हें एंटीसेप्टिक से साफ करें.
  • पशुओं के घाव पर फ्लाई-रिपेलेंट दवाई लगाएं.
  • सभी पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं.
  • पशुओं को दवाई दिए जाने और वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड रखें. 
  • मक्खी, मच्छर, जूं और किलनी से बचाने के लिए कीटनाशक का छिड़काव करें.
  • बीमार पशु को पौष्टिक चारा, मिनरल मिक्सचर और साफ पानी पिलाएं. 
  • संक्रमित पशु के बर्तन, रस्सी, दूध निकालने के उपकरण अलग रखें.
  • बीमार पशु को अच्छी छांव और हवादार जगह पर ही रखें.
  • लंपी पीडि़त पशु की मौत हो जाए तो उसके शव को गड्डे में चूना डालकर गाड़ दें.
  • जहां भी लंपी बीमारी दिखाई दे तो फौरन पशु-चिकित्सक को सूचना दें.

ये काम किए तो बचे रहेंगे हेल्दी पशु  

  • बीमार पशुओं को हेल्दी पशुओं के साथ कभी न रखें.
  • बीमार पशुओं को खुले में न छोड़ें और बिना सुरक्षा (ग्लब्स) के घाव को न छुएं.
  • बीमार पशु को हाट, मेला या एक जगह से दूसरी जगह न ले जाएं.
  • गंदगी, गोबर या पानी को पशुओं के बाड़े के आसपास जमा न होने दें. 
  • बिना डाक्टरी सलाह के पीडि़त पशुओं को दवाइयां न दें.
  • बीमार पशु का दूध, मी या दूसरे प्रोडक्ट इस्तेमाल न करें.
  • कीट नियंत्रण (मक्खी मच्छर, किलनी) की अनदेखी न करें.
  • पीडि़त मरे पशु को खुली जगह या तालाब-नदी के पास फेंकना-गाड़ना मना है.
  • बीमार पशु को लंबी दूरी तक ले जाकर बेचने या खरीदने से बचें.

निष्कर्ष-

पशुओं के बीच लंपी फैलने से रोकने और पीडि़त पशु को बचाने के लिए जरूरी है कि एक्सपर्ट के बताए उपायों का पालन किया जाए. लंपी के खतरे को देखते हुए पहले ही पशुओं को टीका लगवा लें. पशुओं के बाड़े में बायो सिक्योरिटी का पालन करें.

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