
मछली पालन के लिए बनाए जाने वाले तालाब में बांध का रोल बहुत खास होता है. इसीलिए कहा जाता है कि बांध इतना मजबूत होना चाहिये कि वह पानी के दबाव को सह सके. यहां तक की बरसात के दिनों में होने वाले जलभराव के दबाव को भी सह सके. तालाब से पानी के रिसाव को रोक सके. इसलिए नए तालाब के ही नहीं, चालू तालाब के बांध की देखरेख भी अच्छी तरह से करते रहना चाहिए. बांध ऐसा होना चाहिए कि तालाब का पानी बाहर न जाए और बाहर का गंदा पानी तालाब में न आए. इसलिए तालाब की खड़ी खुदाई नहीं करनी चाहिए.
सिर्फ तालाब निर्माण के वक्त ही नहीं चालू तालाब के बांध का भी बहुत ख्याल रखना चाहिए. मत्स्य निदेशालय, रांची, झारखंड (Jharkhand) मछली पालकों को सलाह देता है कि तालाब के जलक्षेत्र को नापने के बाद चारों तरफ पांच से सात फीट जमीन वर्म (Berm) के रूप में छोड़कर बांध बनाया जाय, जिससे बांध की मिट्टी के कटाव को रोककर तालाब में जाने से रोका जा सके.
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