Maize and Soya: डेयरी-पोल्ट्री फीड के लिए चाहिए 12 लाख टन सोया, इंपोर्ट की हो रही डिमांड 

Maize and Soya: डेयरी-पोल्ट्री फीड के लिए चाहिए 12 लाख टन सोया, इंपोर्ट की हो रही डिमांड 

Maize and Soya पोल्ट्री का उत्पादन डिमांड के हिसाब से बढ़ाने में हम कामयाब हो चुके हैं. पोल्ट्री प्रोडक्ट की खपत को भी और बढ़ा लेंगे. लेकिन सबसे बड़ा सवाल है पोल्ट्री फीड का उत्पादन बढ़ाने का. फीड को हम कैसे बढ़ाएंगे, उसके लिए हमारे पास क्या प्लान हैं, क्या आने वाले 10-20 साल की तैयारी हम अभी से कर रहे हैं. ये वो सवाल हैं जो पोल्ट्री सेक्टर में उठ रहे हैं.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 07, 2026,
  • Updated Feb 07, 2026, 10:00 AM IST

‘सोया का उत्पादन कम हो रहा है. सोया के दाम में बड़े अंतर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. बाजार में सोया सीड के दाम 60 हजार रुपये प्रति टन तक के आंकड़े को छू रहे हैं. शुक्रवार को भी दाम 56 हजार रुपये तक पहुंच गए थे. इन्हें रेट पर फीड मिल संचालक खरीद कर रहे हैं. अब ये बात समझ से परे है कि सरकार कैसे हर महीने सोया के दाम औसत 39 हजार से लेकर 49 हजार रुपये तक प्रति टन बता रही है. हालांकि अभी मक्का के दाम बाजार में सही चल रहे हैं. लेकिन सोया के चलते बाजार में फीड के दाम बढ़े हुए हैं. 

इस वक्त फीड मार्केट को कम से कम 12 लाख टन सोया की जरूरत है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सोया इंपोर्ट की जा सकती है.’ ये कहना है पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी रिकी थापर का. उनका कहना है कि खासतौर पर एक्सपोर्ट के लिए पोल्ट्री प्रोडक्ट के दाम कंट्रोल करना बहुत जरूरी है. और ये तभी मुमकिन होगा जब फीड के लिए कच्चा माल जरूरत के मुताबिक और सस्ता मिलेगा. 

सोया पर ये बोले पोल्ट्री एक्सपर्ट 

रिकी थापर ने केन्द्र सरकार से डिमांड करते हुए कहा है कि किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाए बिना फीड सेक्टर के लिए कच्चे माल की उपलब्धता को स्थिर किया जाए. फीड सेक्टर को 12 लाख टन सोया (बीज/डीओसी/मील) के कोटे के आयात की अनुमति दी जाए. क्योंकि मौजूदा सोयाबीन की फसल का अनुमान सिर्फ़ 95-98 लाख टन का है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 15 फीसद कम है. इतना ही नहीं सोयाबीन बीज की लैंडिंग कीमत जनवरी 2025 में 45150 रुपये प्रति टन से बढ़कर जनवरी 2026 में 60900 रुपये प्रति टन हो गई है जो करीब 35 फीसद की बढ़ोतरी है.

बढ़ी 40 लाख टन फीड की डिमांड 

पोल्ट्री एक्सपर्ट का दावा है कि पोल्ट्री सेक्टर हर साल आठ से 10 फीसद की रफ्तार से बढ़ रहा है. अगर अभी की बात करें तो पोल्ट्री के लिए एक साल में चार करोड़ टन फीड चाहिए होता है. अब 10 फीसद की रेट से पोल्ट्री बढ़ रही है तो हर साल 40 लाख टन फीड की डिमांड बढ़ रही है. 40 लाख टन फीड में कम से कम 20 लाख टन मक्का चाहिए. अब हम बात कर रहे हैं विकसित भारत-2047 की. ये 22 साल आगे का प्लान है.

अगर आने वाले 10 साल यानि 2035 की बात करें तो सिर्फ और सिर्फ पोल्ट्री फीड की डिमांड हो जाएगी आठ करोड़ टन. इसमे चार करोड़ टन मक्का चाहिए होगा. जबकि इस साल 2025 में मक्का का उत्पादन चार करोड़, दो लाख टन हुआ है. अब ऐसे में जमीन तो बढ़ेगी नहीं, किसी तरह से हमे प्रति हेक्टेयर उत्पादन ही बढ़ाना होगा. 

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