
सरकार लगातार पशुओं के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा दे कर किसानों की आय और रोजगार को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इसके लिए कई तरह की योजनाएं और अनुदान का प्रबंध कर सरकार किसानों को प्रोत्साहित करने का काम करती है. लेकिन. मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक साथ कई सूअरों को मार देने का आदेश जारी हुआ है. दरअसल जिले में तेजी से बढ़ रहे अफ्रीकन स्वाइन फ्लू नाम की संक्रमण बीमारी के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू एक तरह का संक्रमण रोग है. जो सूअरों में पाया गया है. पशुपालन विभाग द्वारा हाई सिक्योरिटी लैब भोपाल भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट से यह पता चला है कि यह संक्रमण एक सूअर से दूसरे सूअर तक ये बीमारी पहुंच कर उन्हें संक्रमित कर सकता है. यह संक्रमण इतना खतरनाक है कि इसकी चपेट में आने वाला जानवर पूरी तरह से असमर्थ हो जाता और उसकी मौत तक हो सकती है.
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू नामक वायरस इतना खतरनाक है, इसकी चपेट में आने वाले सूअर को जान तक गंवानी पड़ सकती है. एमपी के शिवपुरी में अब तक लगभग 2000 सूअर की मौत हो गई. जिसके कारण सूअर पालन करने वाले लोगों को भारी नुकसान हुआ है. प्रशासन ने इस खतरे को देखते हुए संक्रमित सूअरों को मारने का आदेश जारी किया है.
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शिवपुरी में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू से अब तक करीब 2 हजार सूअरों की मौत हो चुकी है. इस गंभीर खतरे को देखते हुए जिले में विशेष तैयारी की गई है. मानव जीवन को सुरक्षित करने के साथ- साथ स्वस्थ पशुओं की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है. इस समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर मीटिंग में कई आवश्यक निर्णय लिए गए हैं. प्रशासन ने संक्रमित इलाकों को चिन्हित कर सर्विलांस जोन घोषित किया है और सूअरों के मांस की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई है. इसके अलावा संक्रमित सूअरों को पकड़ कर उन्हें इंजेक्शन से मारने की तैयारी में है प्रशासन.
मध्य प्रदेश में आफ्रीकन स्वाइन फ्लू का खतरा सिरदर्द बन चुका है. जिले में इस तरह के गंभीर खतरे को देखते लोगों और अन्य जानवरों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है. प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए कड़ाकदम उठाया है और जिले के संक्रमित इलाकों में पाए जाने वाले सूअरों को इंजेक्शन दे कर मार देने का आदेश जारी किया है.
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