
देश के बफैलो मीट को घरेलू बाजार ही नहीं विदेशी बाजारों में भी बहुत पसंद किया जाता है. एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक विश्व के 136 से ज्यादा देशों में बफैलों मीट एक्सपोर्ट किया जाता है. ईरान भी उसमे से एक है. एक्सपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो ईरान हर साल भारत से 85 से 100 करोड़ रुपये तक का बफैलो मीट खरीदता है. लेकिन अभी बीते 17-18 दिनों से भी ज्यादा वक्त से सप्लाई ठप्प पड़ी हुई है. सप्लाई भी रमजान के ऐसे वक्त में रुकी है जब डिमांड ज्यादा होती है. जानकारों की मानें तो मीट की कैटेगिरी में ईरान सिर्फ बफैलो मीट ही खरीदता है.
बकरे और भेड़ के मीट की डिमांड ईरान से नहीं आती है. आंकड़ों के मुताबिक ईरान को मीट के अलावा डेयरी और सीफूड प्रोडक्ट भी एक्सपोर्ट किए जाते हैं. लेकिन अभी सभी तरह के आइटम की सप्लाई रुकी हुई है. मीट की सप्लाई रुकने से एक्सपोर्टर के बीच खलबली मची हुई है. ईरान, अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई कब खत्म होगी, अभी इसके भी कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं.
एक्सपोर्ट के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में ईरान को 2575 टन बफैलो मीट एक्सपोर्ट हुआ था. जिसकी कीमत करीब 86 करोड़ रुपये थी. लड़ाई के चलते मीट सप्लाई ठप्प होने से पहले भी जनवरी में करीब 5 करोड़ रुपये का मीट सप्लाई हुआ था. जबकि नवंबर 2025 से लेकर जनवरी 2026 तक यानि तीन महीने में ईरान को भारत से 20 करोड़ रुपये का मीट एक्सपोर्ट हुआ था.
इसके अलावा अगर डेयरी प्रोडक्ट की बात करें तो साल 2025 में 8 करोड़ रुपये से ज्यादा का एक्सपोर्ट हुआ था. सीफूड प्रोडक्ट एक्सपोर्ट की बात करें तो सालाना दो से ढाई करोड़ रुपये का ही होता है. गौरतलब रहे कि ईरान झींगा समेत बड़े पैमाने पर मछली उत्पादन करता है.
अगर एपीडा के जारी आंकड़ों पर जाएं तो अकेले बफैलो मीट का एक्सपोर्ट ही बीते तीन साल में सवा लाख टन बढ़ गया है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 में 11 लाख, 75 हजार, 193 टन बफैलो का एक्सपोर्ट हुआ था. वहीं साल 2022-23 में 11 लाख, 75 हजार, 869 टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. लेकिन साल 2023-24 का आंकड़ा खासा चौंकाने वाला है. बीते साल 12 लाख, 95 हजार, 603 टन बफैलो मीट का एक्सपोर्ट भारत से दुनिया के अलग-अलग देशों को हुआ था. इसकी कीमत 31 हजार करोड़ रुपये थी.
आपको ये जानकर हैरत होगी लेकिन सच ये ही है कि मीट प्रोसेसिंग यूनिट में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की टाइमिंग भी हलाल सर्टिफिकेट के नियमों के मुातबिक सेट की जाती है. अगर मशीनों की टाइमिंग हलाल के हिसाब से नहीं है तो उस कंपनी को सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा. इतना ही नहीं कंपनी में जानवर या मुर्गे को हलाल (काटने) करने वाला कर्मचारी मुस्लिम होना जरूरी है.
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