मौत के सैलाब पर जिंदगी का जुगाड़! उत्तराखंड के गांव में पेड़ से बना पुल बना सहारा

मौत के सैलाब पर जिंदगी का जुगाड़! उत्तराखंड के गांव में पेड़ से बना पुल बना सहारा

उत्तराखंड के चकराता में मॉनसून की बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पुल नहीं बनने से छजाड खेड़ा नखारी गांव के लोगों ने उफनती नदी पर पेड़ डालकर अस्थायी पुल बना लिया. जान जोखिम में डालकर नदी पार करते ग्रामीणों का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की पोल खोल दी है.

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मौत के सैलाब पर जिंदगी का जुगाड़! उत्तराखंड के गांव में पेड़ से बना पुल बना सहाराउत्तराखंड से खौफनाक तस्वीरें

उत्तराखंड में मॉनसून की बारिश कई इलाकों के लोगों के लिए परेशानी बन गई है. पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूट रहा है. इसी बीच देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र के छजाड खेड़ा नखारी गांव से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए अपनी जान खतरे में डालनी पड़ रही है. पुल नहीं बनने के कारण गांव के लोगों ने मजबूरी में एक बड़े पेड़ को नदी के ऊपर डालकर उसे अस्थायी पुल बना दिया. 

पुल की मांग पूरी नहीं हुई तो ग्रामीणों ने खुद उठाया कदम

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में हर साल गांव के पास बहने वाली बरसाती नदी तेज बहाव में आ जाती है. पानी बढ़ने के बाद गांव का संपर्क मुख्य इलाकों से कट जाता है. लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है. कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से यहां पक्का पुल बनाने की मांग की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया.

आखिरकार परेशान होकर ग्रामीणों ने खुद ही रास्ता बनाने का फैसला लिया. उन्होंने एक बड़े पेड़ को काटकर नदी के ऊपर डाल दिया और उसे ही आने-जाने के लिए पुल की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. यह पुल देखने में काफी खतरनाक है, लेकिन ग्रामीणों के पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को होती है. अगर किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ता है. कई बार फसल समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पाती, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है.

ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते यहां पुल बन जाता तो उन्हें हर साल इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.

जान जोखिम में डालकर जांचा पुल की मजबूती

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि ग्रामीण खुद इस पेड़ से बने पुल पर चलकर इसकी मजबूती जांच रहे हैं. तेज बहाव वाली नदी के ऊपर बने इस अस्थायी पुल से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं है. जरा सी लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है.

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने यह कदम मजबूरी में उठाया है. उन्हें पता है कि यह रास्ता सुरक्षित नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें इसी का सहारा लेना पड़ रहा है.

वायरल वीडियो ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो देखने के बाद लोग पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलों को लेकर चिंता जता रहे हैं. कई लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ग्रामीणों की समस्या को जल्द दूर किया जाए और वहां एक सुरक्षित पुल बनाया जाए.

लोगों का कहना है कि मॉनसून के समय पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही कई खतरे रहते हैं. ऐसे में लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए.

ग्रामीणों को सुरक्षित पुल का इंतजार

फिलहाल पेड़ से बना यह अस्थायी पुल ग्रामीणों की समस्या को कुछ हद तक कम कर रहा है, लेकिन यह लंबे समय का समाधान नहीं है. तेज बारिश और बढ़ते पानी के बीच इस पुल से गुजरना कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है.

ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी समस्या सामने आने के बाद प्रशासन जल्द कदम उठाएगा और गांव में एक मजबूत व सुरक्षित पुल की व्यवस्था करेगा. यह घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कई लोगों की मुश्किलों को दिखाती है, जहां आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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