
हौसला, मेहनत और सही दिशा में उठाया गया एक कदम किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकता है.इसकी मिसाल हैं झारखंड की रहने वाली अनीता बेक, जिन्होंने बेहतर भविष्य की तलाश में भोपाल को अपनी कर्मभूमि बनाया और आज प्रदेश के सबसे बड़े आधुनिक मशरूम उत्पादकों में अपनी पहचान बना ली है. उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की सहायता से भोपाल के पास करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मशरूम प्लांट स्थापित किया है. आज इस प्लांट से न केवल रोजाना सैकड़ों किलो बटन मशरूम का उत्पादन हो रहा है, बल्कि गांव की महिलाओं को भी स्थायी रोजगार मिल रहा है.
अनीता बेक बताती हैं कि उन्होंने मशरूम उत्पादन को अपना व्यवसाय बनाने का फैसला किया तो सबसे पहले भोपाल के पास एयरपोर्ट से लगभग 12 किलोमीटर दूर पूरा छिंदवाड़ा गांव में जमीन खरीदी.परिवार में बुजुर्ग पिता के सहारे यह फैसला आसान नहीं था. एक महिला उद्यमी होने के कारण उन्हें कई तरह की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे अपने सपने को साकार कर दिखाया.
मशरूम उत्पादन शुरू करने से पहले अनीता ने हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरूम निदेशालय से विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके साथ ही उन्होंने थाईलैंड से मैनेजमेंट की पढ़ाई भी की, जिसका लाभ उन्हें अपने उद्यम को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मिला. आज वह अपनी 10 वर्षीय बेटी की परवरिश और शिक्षा के साथ-साथ पूरे मशरूम प्लांट का संचालन स्वयं संभाल रही हैं.
अनीता बेक का मशरूम प्लांट 129 टन क्षमता का है.यहां प्रतिदिन 300 से 400 किलोग्राम बटन मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है.भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में ताजे मशरूम की अच्छी मांग होने के कारण उनके उत्पादों की बाजार में मजबूत पकड़ बन गई है. क्षेत्र में इस स्तर का दूसरा बड़ा मशरूम प्लांट नहीं होने से उन्हें इसका विशेष लाभ भी मिल रहा है.
अनीता द्वारा उत्पादित ताजा बटन मशरूम अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. बाजार में अच्छे मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है.आज उनकी मशरूम की क्वालिटी को देख बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी उनके दरवाजे पर खड़े हैं. बिग बॉस्केट, ब्लिंकिट और रिलायंस फ्रेश जैसे बड़े रिटेल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंच रही है.इससे उन्हें बेहतर बाजार और उचित कीमत मिल रही है.
अनीता का मानना है कि महिलाओं को अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं. यही कारण है कि उन्होंने अपने प्लांट में गांव की एक दर्जन से अधिक महिलाओं को रोजगार दिया है. मशरूम उत्पादन, देखभाल, कटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और अन्य सभी कार्यों में महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं.इससे गांव की महिलाओं की आय बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं.
अनीता बेक केवल मशरूम उत्पादन तक ही सीमित नहीं हैं.वह मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले स्पेंट मशरूम सब्सट्रेट (वेस्ट) से उच्च गुणवत्ता वाली कंपोस्ट खाद भी तैयार कर रही हैं.उनका कहना है कि इस खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो किसानों के लिए बेहद उपयोगी हैं.इससे जहां किसानों को अच्छी जैविक खाद मिल रही है, वहीं यह उनके लिए अतिरिक्त आय का भी स्रोत बन गया है.
अनीता बेक की कहानी यह साबित करती है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो कृषि आधारित व्यवसायों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. झारखंड से भोपाल तक का उनका सफर आज न केवल महिला उद्यमियों बल्कि युवाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुका है.
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