अल-नीनो की वजह से होने वाले सूखे से भारत समेत पूरी दुनिया के बच्चे प्रभावित होंगे. (Photo: ITG)दो-चार दिन की बारिश से पूरे मॉनसून की चाल का अंदाजा लगाना मुश्किल है. यह भी नहीं कहा जा सकता कि अल नीनो का असर नहीं है या अल नीनो अभी एक्टिव नहीं हुआ है. दुनिया की कई मौसम एजेंसियां बता रही हैं कि आने वाले महीने में अल नीनो से हालात अधिक बिगड़ेंगे. सूखे और बाढ़ जैसी गतिविधियां बढ़ेंगी. जिन देशों पर इसका ज्यादा असर होगा, उनमें भारत भी एक है. यहां की मौसम एजेंसी IMD पहले ही बता चुकी है कि मॉनसून की बारिश सामान्य से कम होगी.
वर्ल्ड मेटरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन यानी WMO की महासचिव सेलेस्टे साऊलो ने कहा कि अल नीनो जारी है और आने वाले दिनों में इसके ज्यादा मजबूत होने की आशंका है. वे बताती हैं कि अल नीनो से सूखे और भारी बारिश का खतरा बढ़ सकता है. यहां तक कि मैदानी इलाकों और समुद्र में हीटवेव की घटनाएं बढ़ेंगी. समुद्र में लू चलने से मछलियों और प्लैंक्टन आदि के मरने का खतरा बढ़ेगा.
WMO का यह अनुमान भारत के लिए अहम है क्योंकि जून में पहले ही बारिश में लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिसमें मध्य भारत सबसे अधिक प्रभावित रहा है और वहां 50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज की गई है. 1901 के बाद से देश में इस महीने में पांचवीं सबसे कम (99.5 मिमी) बारिश हुई है.
हालात और खराब करने वाली बात यह है कि 30 जून को अपने मंथली बुलेटिन में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि जुलाई में 'लॉन्ग-पीरियड एवरेज' (LPA) बारिश का 94 प्रतिशत होने की सबसे ज्यादा संभावना है, भले ही महीने के पहले सात से 10 दिनों में पूरे देश में बारिश की उम्मीद है.
जुलाई के शुरुआती आठ दिनों में भारत में सामान्य से कहीं ज़्यादा बारिश हुई है. इस दौरान सामान्य बारिश 65.1 mm होती है, लेकिन पूरे देश में 92.3 mm बारिश दर्ज की गई है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बारिश की कमी का खतरा टल गया है. असल में, अल-नीनो के हालात और मजबूत होने की आशंका है, जिससे बारिश की कमी और बढ़ सकती है. IMD ने जून में सामान्य से कम बारिश के मुख्य कारणों में अल-नीनो को पहले ही शामिल किया है.
दुनिया की मौसम एजेंसियों ने अपने अलर्ट में कहा है कि भारत में जिस वक्त बुवाई अपने चरम पर होगी, उस वक्त अल नीनो की मजबूती किसी आपदा से कम नहीं क्योंकि भारत का आधा खरीफ इलाका मॉनसून पर आधारित है. इन इलाकों में खरीफ फसलों की बुवाई तभी पूरी होगी जब मॉनसून की बारिश होगी. कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में धान समेत खरीफ फसलों की बुवाई काफी पीछे रही. मंत्रालय ने बताया कि जून तक खरीफ की बुवाई का कुल रकबा 182.72 लाख हेक्टेयर था, जो एक साल पहले के 236.46 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 23 प्रतिशत कम है. पिछले महीने धान के साथ-साथ दालों, तिलहन, मोटे अनाज और कपास की बुवाई भी जून 2025 की तुलना में कम रही.
ज्यादा असरदार अल-नीनो की वजह से सामान्य से अधिक तापमान को लेकर भी चिंताएं हैं. IMD ने पिछले महीने कहा था कि जून का महीना सामान्य से ज्यादा गर्म रहा. पिछले महीने औसत अधिकतम तापमान 35.67 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.06 डिग्री अधिक है. इस तरह यह रिकॉर्ड पर 15वां सबसे गर्म जून रहा.
जुलाई के लिए अपने अनुमान में मौसम विभाग ने कहा है कि जुलाई में देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है, सिवाय पश्चिम-मध्य भारत के कुछ इलाकों के. मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ इलाकों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ज्यादा रहेगा. इस लिहाज से दो चार दिनों की तेज बारिश से पूरे मॉनसून के रुख का अंदाजा लगाना मुश्किल है. देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में बारिश की चाल कैसी रहती है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today