मॉनसून पर लगेगा ब्रेक (AI- तस्वीर)देशभर में पिछले कई दिनों से हो रही तेज बारिश ने जहां सूखे खेतों को राहत दी, वहीं कई शहरों में जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी खड़ी कर दीं. लेकिन अब किसानों और आम लोगों के लिए एक नया मौसम अपडेट सामने आया है. दरअसल, मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, देश के बड़े हिस्से में मॉनसून पर कुछ दिनों के लिए ब्रेक लगने वाला है. अगले 5 से 7 दिनों तक कई राज्यों में बारिश काफी कम हो सकती है या बिल्कुल नहीं होगी. ऐसे में धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है. वहीं, नई बोई गई खरीफ फसलों के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले नौ दिनों से देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है. इस बारिश ने जून महीने की कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया है. बता दें कि इस बार जून पिछले 126 वर्षों में पांचवां सबसे सूखा जून महीना रहा था, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी. हालांकि, जुलाई की शुरुआत में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ी और उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में अच्छी बारिश हुई, इससे खेतों में बुवाई का काम तेज हुआ और जलाशयों में भी पानी बढ़ा.
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मॉनसून की सक्रिय पट्टी (Monsoon Trough) अब हिमालय की तलहटी की ओर खिसक रही है. इसके कारण पश्चिमी दिशा से आने वाली शुष्क हवाएं देश के भीतरी हिस्सों में प्रवेश करेंगी. इन शुष्क हवाओं के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मॉनसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं. यानी जिन इलाकों में पिछले दिनों अच्छी बारिश हुई थी, वहां अब बारिश पर ब्रेक लगने की संभावना है.
अगले 5 से 7 दिनों के दौरान इन राज्यों में बारिश कम रहने की संभावना जताई गई है. जिसमें, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं. वहीं, इन राज्यों में तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में नमी अधिक रहने के कारण तापमान सामान्य से ज्यादा महसूस हो सकता है और कई जगह लोगों को 45 से 50 डिग्री सेल्सियस जैसी गर्मी का एहसास हो सकता है.
दूसरी ओर, मॉनसून की सक्रिय पट्टी के करीब स्थित राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा. जिनमें, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्य शामिल हैं. इन इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. ऐसे में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
मॉनसून पर लगने वाला यह ब्रेक किसानों के लिए चिंता का कारण बन सकता है. खासकर धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलें शुरुआती अवस्था में लगातार नमी चाहिए होता है. ऐसे में अगर अगले कुछ दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई और सिंचाई की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं रही, तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, उन्हें सबसे अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, जिन क्षेत्रों में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है, वहां नुकसान की संभावना कम रहेगी.
आईएमडी ने पहले ही जुलाई महीने में सामान्य से कम यानी दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 94 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था. मौजूदा स्थिति उसी पूर्वानुमान के अनुरूप मानी जा रही है. हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ दिनों का ब्रेक सामान्य प्रक्रिया है. अच्छी बात यह है कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में मॉनसून फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है. यदि ऐसा होता है, तो खरीफ फसलों को दोबारा पर्याप्त नमी मिल सकती है. फिलहाल किसानों को मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखने, जहां संभव हो वहां सिंचाई की व्यवस्था करने और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती से जुड़े फैसले लेने की सलाह दी जा रही है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today