विदर्भ में बदलेगा मौसम, भारी बारिश से किसानों को मिल सकती है सूखे से राहत

विदर्भ में बदलेगा मौसम, भारी बारिश से किसानों को मिल सकती है सूखे से राहत

सूखे और कम बारिश से परेशान विदर्भ के किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. नागपुर प्रादेशिक मौसम विभाग ने 23 सितंबर की शाम से विदर्भ में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान जताया है. गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर और यवतमाल में 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है.

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विदर्भ में भारी बारिश का अलर्ट, किसानों को राहत की आसमहाराष्ट्र के किसानों के लिए राहत भरी खबर (AI जनरेटेड इमेज)

कम बारिश और सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे विदर्भ के किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. नागपुर प्रादेशिक मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 23 सितंबर की शाम से पूर्वी और पश्चिमी विदर्भ में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. अगले तीन से चार दिनों तक कई इलाकों में अच्छी से भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है.

मौसम में इस बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी में बनने वाली कम दबाव की स्थिति को प्रमुख कारण बताया गया है. इसके प्रभाव से विदर्भ के कई हिस्सों में बारिश तेज हो सकती है. ऐसे समय में यह बारिश किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में खड़ी फसलें नमी की कमी से जूझ रही हैं.

24-25 सितंबर को इन चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर और यवतमाल जिलों में 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश की आशंका को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.

इस दौरान कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है. आंधी और तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है. ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

किसानों के लिए भी यह अलर्ट अहम है. बारिश शुरू होने से पहले किसानों को खेतों में खड़ी फसलों और कृषि उपकरणों को सुरक्षित रखने और मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है.

बंगाल की खाड़ी में बन रही मौसमी प्रणाली

नागपुर प्रादेशिक मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बनने वाली कम दबाव की प्रणाली के प्रभाव से विदर्भ में मॉनसून की गतिविधियां एक बार फिर तेज होने की संभावना है.

नागपुर मौसम केंद्र के वैज्ञानिक प्रवीण कुमार की ओर से भी विकसित हो रही इस मौसमी प्रणाली और विदर्भ पर पड़ने वाले संभावित असर की जानकारी दी गई है. अनुमान है कि कम दबाव का प्रभाव बढ़ने के साथ क्षेत्र के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं.

23 सितंबर की शाम से शुरू होने वाला यह दौर अगले तीन से चार दिन तक विदर्भ के लिए महत्वपूर्ण रह सकता है.

सूखे से परेशान किसानों के लिए क्यों अहम है बारिश?

इस साल पर्याप्त बारिश नहीं होने से विदर्भ के कई इलाकों में कृषि संकट बढ़ा है. सामान्य से कम बारिश और लंबे ड्राई स्पेल के कारण खेतों में नमी की कमी देखने को मिली है. इसका सीधा असर खड़ी फसलों पर पड़ा है.

ऐसे में सितंबर के आखिर में होने वाली अच्छी बारिश उन फसलों के लिए मददगार हो सकती है, जिन्हें अभी पानी की जरूरत है. खास तौर पर उन क्षेत्रों में बारिश महत्वपूर्ण साबित हो सकती है जहां किसान लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

हालांकि ज्यादा बारिश होने की स्थिति में किसानों के सामने दूसरी तरह की मुश्किलें भी पैदा हो सकती हैं. इसलिए मौसम विभाग ने किसानों को मौसम की स्थिति के अनुसार जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है.

एक तरफ राहत की आस, दूसरी तरफ भारी बारिश का खतरा

विदर्भ के लिहाज से आने वाला बारिश का दौर दोहरा असर डाल सकता है. जिन इलाकों में मिट्टी में नमी कम है, वहां अच्छी बारिश फसलों को राहत दे सकती है. वहीं लगातार या बेहद भारी बारिश वाले स्थानों पर खेतों में जलभराव का खतरा भी रह सकता है.

आंधी, बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी के कारण खड़ी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है. इसलिए किसानों के लिए यह जरूरी होगा कि वे स्थानीय मौसम की चेतावनियों के अनुसार खेती से जुड़े फैसले लें.

महाराष्ट्र में सूखे के आकलन की प्रक्रिया भी अहम

बारिश में कमी के बीच महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में सूखे को लेकर चिंता बनी हुई है. सूखा घोषित करने के लिए केवल बारिश की कमी को ही आधार नहीं बनाया जाता. बारिश के साथ बुवाई का क्षेत्र, मिट्टी में नमी और भूजल स्तर जैसे फैक्टर का भी आकलन किया जाता है.

इसके अलावा चारे की उपलब्धता, पेयजल की कमी, रोजगार की मांग और पलायन जैसे मुद्दों पर भी गौर किया जाता है.

इनपुट के मुताबिक खरीफ सीजन के लिए सूखा घोषित करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर है, जबकि रबी सीजन के लिए यह समयसीमा 31 मार्च है. वहीं सूखा प्रभावित गांवों में पीने के पानी की समस्या पैदा होने पर स्थानीय स्तर पर टैंकरों की व्यवस्था की जा सकती है.

सोलापुर में भी गंभीर हालात

विदर्भ के अलावा महाराष्ट्र के कुछ दूसरे हिस्से भी कम बारिश की समस्या का सामना कर रहे हैं. इनपुट के मुताबिक सोलापुर जिले में स्थिति गंभीर बनी हुई है. यहां सामान्य के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत कम बारिश होने और फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की बात कही गई है.

दावा है कि जिले में करीब 80 से 85 प्रतिशत तक फसलें प्रभावित हुई हैं और अगर लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है. जिले के 68 गांवों के टैंकर से पानी की आपूर्ति पर निर्भर होने की बात भी सामने आई है.

हालांकि सोलापुर की स्थिति विदर्भ में संभावित बारिश से अलग है, लेकिन यह महाराष्ट्र में असमान मॉनसूनी बारिश के कारण किसानों के सामने पैदा हुई चुनौती को दिखाती है.

किसानों की नजर अब आसमान पर

फिलहाल विदर्भ के किसानों की उम्मीदें 23 सितंबर के बाद शुरू होने वाले बारिश के संभावित दौर पर टिकी हैं. अगर अनुमान के मुताबिक अच्छी और नियंत्रित बारिश होती है तो नमी की कमी से जूझ रही फसलों को फायदा मिल सकता है.

लेकिन गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर और यवतमाल जैसे ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी.

यानी विदर्भ में किसानों को जिस बारिश का लंबे समय से इंतजार था, अब उसी बारिश से राहत की उम्मीद भी है और भारी होने पर नुकसान का खतरा भी. आने वाले तीन से चार दिन इस लिहाज से किसानों और खरीफ की फसलों के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं.(योगेश पांडेय का इनपुट)

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