'मुरासु' तूफान का खतराअर्नब तूफान का असर अभी पूरी तरह थमा भी नहीं है कि अब मौसम विभाग की ओर से 'मुरासु' तूफान को लेकर चेतावनी ने बस्तर संभाग के लोगों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में मंगलवार सुबह से ही बारिश का दौर जारी है. आसमान में सुबह से बादलों का पहरा बना हुआ है. मौसम में आए इस बदलाव के बाद जिले में एक बार फिर भारी बारिश की आशंका जताई जा रही है.
मौसम संबंधी चेतावनी के अनुसार 4 नवंबर को बस्तर संभाग के कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है. इसमें सुकमा, बस्तर, बीजापुर और दंतेवाड़ा सहित आसपास के इलाके शामिल हैं. इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका जताई गई है. मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.
बता दें कि हाल ही में अर्नब तूफान के प्रभाव से सुकमा और बस्तर संभाग के कई इलाकों में लगातार बारिश हुई थी. वहीं, कई जगहों पर नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ था. निचले इलाकों में पानी भरने और आवागमन बाधित होने से ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था. इसके बाद अब 'मुरासु' तूफान की आहट ने एक बार फिर लोगों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है. लगातार बदलते मौसम के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संभावित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी ने सबसे ज्यादा चिंता किसानों की बढ़ा दी है. अर्नब तूफान के दौरान हुई बारिश से कई क्षेत्रों में धान की फसल प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी. कई किसानों की कटी हुई धान की फसल खेतों में पड़ी है, वहीं, कुछ किसानों की फसल अभी कटाई के इंतजार में है. ऐसे में दोबारा बारिश होने से धान की फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है.
किसानों का कहना है कि पहले ही बेमौसम बारिश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अब एक बार फिर बारिश की संभावना से उनकी मेहनत पर पानी फिरने का डर सता रहा है. ऐसे में लगातार बारिश होती है तो खेतों में रखी धान की फसल के साथ-साथ कटाई का काम भी प्रभावित हो सकता है.
मौसम विभाग की चेतावनी के बीच बस्तर संभाग के संवेदनशील और नदी-नालों के आसपास बसे गांवों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है. तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए. वहीं, निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखने की जरुरत है.
फिलहाल सुकमा जिले में लगातार हो रही बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है. अर्नब तूफान के बाद अब 'मुरासु' का संभावित असर लोगों के लिए नई चुनौती बन सकता है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक बार फिर बस्तर में बारिश जनजीवन को प्रभावित करेगी और क्या किसानों की बची हुई फसल भी मौसम की मार झेलेगी? आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
तूफान के चलते लगातार हो रही बारिश से किसानों और व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है, खेतों में धान की फसल पककर तैयार है और कई किसानों ने कटाई भी कर ली है, लेकिन बारिश के कारण खेतों में रखी फसल खराब होने की आशंका बढ़ गई है. वहीं, बारिश का असर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. पटाखा, मिठाई और इलेक्ट्रिकल दुकानों में ग्राहकों की आवाजाही कम होने से व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. किसानों को फसल की चिंता सता रही है, तो दूसरी ओर त्योहार के सीजन में व्यापारियों को आर्थिक नुकसान की आशंका है. (धर्मेंद्र सिंह की रिपोर्ट)
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