अन नीनो पर सरकार का एक्शन प्लानदेशभर में मॉनसून की धीमी प्रगति और कम बारिश की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल 20 जुलाई तक देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश के आसार नहीं हैं. केवल तराई क्षेत्र के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई जा रही है. हालांकि मौसम की स्थिति में बदलाव के संकेत हैं और 20 जुलाई के बाद मॉनसून के फिर से रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है.
सूत्रों के अनुसार, इस समय देश के 372 जिलों में मॉनसून कमजोर बना हुआ है, जबकि 68 जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं. बारिश की कमी का असर कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है. चालू खरीफ सीजन में अब तक करीब एक करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई कम हुई है.
स्थिति की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सबसे अधिक प्रभावित 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे. इन राज्यों में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत अन्य प्रभावित राज्य शामिल हैं. बताया जा रहा है कि कृषि मंत्री इससे पहले भी प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर चुके हैं और अब राज्यवार समीक्षा के जरिए जमीनी हालात का आकलन किया जाएगा.
सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार राज्यों को हर संभव सहायता उपलब्ध करा रही है. सरकार ने मॉनसून की अनिश्चितता को देखते हुए अप्रैल महीने से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए थे, ताकि बारिश में कमी की स्थिति से निपटा जा सके.
आमतौर पर खरीफ फसलों की बुवाई जुलाई के अंत तक पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार परिस्थितियों को देखते हुए बुवाई का सीजन 15 अगस्त तक बढ़ने की संभावना है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 20 जुलाई के बाद मॉनसून में सुधार होता है तो बुवाई के आंकड़ों में भी तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है. फिलहाल सरकार की नजर बारिश की स्थिति और कृषि गतिविधियों पर बनी हुई है.
अल नीनो के संभावित प्रभाव और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर के किसान संगठनों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. सूत्रों के अनुसार, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में अलग-अलग किसान संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और मौजूदा कृषि हालात पर विस्तार से चर्चा करेंगे.
सूत्रों का कहना है कि यह बैठक अल नीनो से पैदा होने वाली चुनौतियों और किसानों से जुड़े मुद्दों के मद्देनजर बेहद अहम मानी जा रही है. बैठक में किसान संगठन सीधे कृषि मंत्री के सामने अपने सुझाव और चिंताएं रखेंगे. साथ ही संभावित मौसम की परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किए गए कंटींजेंसी (इमरजेंसी) प्लान पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है.
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, अल नीनो की स्थिति और उसके संभावित प्रभावों पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है. मंत्रालय स्तर पर प्रत्येक मंगलवार को समीक्षा बैठक आयोजित कर हालात का आकलन किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें.
सूत्रों के अनुसार, मॉनसून के शुरुआती चरण में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई थी. जून महीने में देशभर में सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी. हालांकि जुलाई में बारिश की स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला है. पिछले तीन से चार दिनों के दौरान कई राज्यों में हुई अच्छी बारिश के चलते कुल बारिश घाटा घटकर 24 प्रतिशत रह गया है.
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