संतकबीरनगर जिले के युवा किसान यशवर्धनएक प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के नाथनगर की है. महज 24 साल के युवा यशवर्धन न सिर्फ आत्मनिर्भर बने, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करके लखनऊ के एक निजी होटल में नौकरी कर रहे थे. लेकिन मन खेती-किसानी में ज्यादा नहीं लगता था. यही वजह है कि नौकरी छोड़कर मक्का की खेती करने लगे. युवा किसान यशवर्धन आज मक्का की खेती से सालाना 32 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं. वहीं मक्का के साथ धान और आलू से 20 लाख रुपये की आय हो रही है. किसान तक से बातचीत में उन्होंने बताया कि दो साल पहले (Nathnagar Agrotech Farmer Producer company) के नाम से एक FPO का गठन किया और मक्का की खेती में बड़ा मुकाम हासिल किया. आज हम लोग 10,000 क्विंटल तक मक्का का उत्पादन कर रहे है, जिससे न सिर्फ उनकी आय में बढ़ोतरी हुई बल्कि आसपास के किसानों को भी लाभ मिल रहा है.
उन्होंने बताया कि मेरे पिता जी कृषि विभाग में कार्य करते थे. खेती से जुड़े हुए बहुत से टिप्स उनसे सीखा और मुझे मक्का की खेती करने की प्रेरणा मिली. दरअसल, मक्का की खेती करने की सबसे बड़ी वजह है कि डिस्टिलरी में इसकी डिमांड बहुत अधिक है. हमने आईजीएल में सप्लाई भी किया है. बेबाक अंदाज में बातचीत करने वाले जोशीले यशवर्धन कहते हैं कि कृषि विभाग की तरफ से बहुत मदद मिलती हैं. वर्तमान में 10,000 क्विंटल तक मक्का का उत्पादन जायद में हो रहा है, वहीं आने वाले समय में यह दायरा और बढ़ेगा.
संतकबीरनगर जिले के नाथनगर निवासी यशवर्धन ने बताया कि पूर्वांचल में कभी 17-18 चीनी मिले थी, लेकिन अभी 4-5 चीनी मिले काम कर रही है. वहीं ज्यादा किसान गन्ना की खेती करते है. लेकिन मेरे पिता जी का विजन का नगदी फसल की तरफ था. क्योंकि मक्का की खेती हर सीजन में किया जा सकता है. वहीं मल्टी क्रॉपिंग के तहत हम मक्का के जून में धान और आलू की खेती भी करते है. उन्होंने बताया कि 12 महीने हम लोगों का खेत खाली नहीं रहता है.
24 साल के युवा किसान ने आगे बताया कि वर्तमान में हमारे FPO से जुड़े किसान 550 एकड़ में मक्का की खेती कर रहे है. वहीं हमारी FPO से 500 से अधिक किसान रजिस्टर्ड भी हैं, बाकी किसानों के जुड़ने का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ रहा है. यशवर्धन बताते हैं कि वर्मीकम्पोस्ट से मक्की की खेती करने का आइडिया हमको हमारे पिता जी से मिला है. हम लोग वर्मीकम्पोस्ट से मक्का की खेती कर रहे थे और हमारे घर पर वर्मी कंपोस्ट में तैयार किया जाता है, इसलिए हम जैविक खेती कर रहे हैं.
संतकबीरनगर जिले के तरयापार गांव के रहने वाले यशवर्धन ने बताया कि इस बार मक्के की खेती से अच्छा इनकम होने की उम्मीद है, क्योंकि इस बार फसल काफी अच्छी लगी है और अच्छा उत्पादन होगा. वहीं मक्के की बुवाई लाइन टू लाइन की जाती है.
उधर, उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में मक्का का क्षेत्रफल 10.85 लाख हेक्टेयर, उत्पादन 30.55 मीट्रिक टन तथा औसत उत्पादकता 28.15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में रबी एवं जायद सीजन में मक्का अन्तर्गत आच्छादन, उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि किए जाने की पर्याप्त संभावनाएं हैं.
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