फसलों की सही लागत की होगी स्टडी (AI Image)महाराष्ट्र सरकार ने बीते दिन किसानों के हित में कुछ अहम फैसले और दिशा-निर्देश जारी किए हैं. राज्य सराकर ने प्रदेश के चार कृषि विश्वविद्यालयों को फसलों के पैटर्न की विस्तृत स्टडी करने और रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है. राज्य सरकार ने यह फैसला बदलते जलवायु हालात को देखते हुए फसल उत्पादन की असल लागत तय करने लिए उठाया है. महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने मंगलवार को राज्य कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की एक बैठक में चार कृषि विश्वविद्यालयों को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए.
कृषि मंत्री ने कहा कि मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और बारिश की अनिश्चितता से फसलों की पैदावार और इनपुट लागत पर काफी असर देखने को मिल रहा है. उन्होंने राहुरी (अहिल्यानगर जिला), अकोला, परभणी और दापोली (रत्नागिरी जिला) स्थित कृषि विश्वविद्यालयों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की मुख्य फसलों की स्टडी करने के लिए कहा है.
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, कृषि मंत्री ने फसल लागत रिपोर्ट में मजदूरी की बढ़ती लागत, कीटों और बीमारियों के हमले के कारण कीटनाशकों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पैदावार में आई कमी जैसे फैक्टर्स को शामिल करने की बात कही है.
राज्य कृषि मूल्य आयोग कृषि उपज/उत्पादों की सही कीमत और उत्पादन की लागत तय करता है. जलवायु परिवर्तन के कारण बीज, खाद, मजदूरी और पैदावार में काफी बदलाव हुए हैं, ऐसे में इसका आकलन करना जरूरी हो गया है.
भरणे ने स्टेट CACP के कामकाज को तेज करने लिए खाली पदों को भरे जाने को लेकर कहा कि राज्य सरकार इस बारे में सकारात्मक है. साथ ही उन्होंने वाहनों, अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग, लैपटॉप और टैबलेट दिलवाने से से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार करने की बात कही.
इसके अलावा उन्होंने अफसरों को आयोग के लिए एक समर्पित वेबसाइट शुरू करने के लिए 'महाIT' (MahaIT) प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है. वहीं, उन्होंने फसलों की लागत से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने के लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने के लिए एकव्यवस्था तैयार करने के लिए भी कहा है.
बता दें कि CACP की बताई लागत से ही किसानों के लिए समर्थन मूल्य तय किया जाता है. वहीं, बाजार में कम दाम मिलने या आपदा के समय भी नुकसान होने पर इसी लागत के आधार पर किसानों को मुआवजा या राहत दी जाती है. (एजेंसी)
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