सब्जी की उन्नत किस्मों के प्रसार के लिए IIVR की बड़ी पहलसरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए बेहतर योजनाओं का संचालन कर रही है. वहीं किसानों की आय बढ़ाने और उन्नत कृषि तकनीकों के प्रसार को गति देने के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान का प्रयास सराहनी है. आईसीएआर–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी ने दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर आज हस्ताक्षर किए हैं. इन समझौतों का उद्देश्य संस्थान द्वारा विकसित उन्नत सब्जी किस्मों का व्यापक प्रसार, बीज उत्पादन और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है.
आईआईवीआर ने सोनभद्र स्थित एसआरजीपी एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया है, जिसके तहत संस्थान द्वारा विकसित 20 उन्नत सब्जी किस्मों के व्यावसायीकरण, बीज उत्पादन और विपणन के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया है.
इन उन्नत किस्मों में लोबिया की काशी निधि, तोरई की काशी नंदा, नेनुआ की काशी श्रेया, लौकी की काशी कुंडल और काशी गंगा, करेला की काशी प्रतिष्ठा और काशी मयूरी, मिर्च की काशी अनमोल, बैंगन की काशी उत्तम, टमाटर की काशी अमन और काशी विशेष, कद्दू की काशी हरित, भिंडी की काशी साहिशानु, पालक की काशी बारहमासी, चौलाई की काशी सुहावनी, मटर की काशी नंदिनी और काशी उदय, मूली की काशी आर्द्रा, बाकला (फाबा बीन) की काशी संपदा और परवल की काशी परवल-141 शामिल हैं.
अनुसंधान और परीक्षण के बाद विकसित इन किस्मों की विशेषता उच्च उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता, कीट और रोगों के प्रति सहनशीलता और विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में बेहतर अनुकूलता है. इन किस्मों के प्रसार से किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता की उपज मिलेगी, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त हो सकेगी.
संस्थान ने कर्मयोगी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के साथ भी एक अन्य एमओयू किया है. इस समझौते का उद्देश्य स्मार्ट सब्जी उत्पादन, किसान समूहीकरण (फार्मर एग्रीगेशन) और प्रभावी बाजार संपर्क को बढ़ावा देना है.
इस सहयोग के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक समेकित सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे सब्जी उत्पादन प्रणाली अधिक संगठित, लाभकारी और टिकाऊ बन सके.
संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि इस तरह के समझौते संस्थान द्वारा विकसित उन्नत सब्जी किस्मों और प्रौद्योगिकियों के प्रभावी प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इससे संस्थान की उच्च गुणवत्ता वाली किस्में बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचेंगी और उनकी आय में प्रत्यक्ष रूप से वृद्धि होगी.
उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच इस प्रकार की साझेदारी से नई तकनीकों का तेजी से प्रसार, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता और सब्जी क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा.
समझौता ज्ञापन पर संस्थान की ओर से निदेशक डॉ. राजेश कुमार, एसआरजीपी एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से शिवांशु कुमार और कर्मयोगी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मोहित ने हस्ताक्षर किए.
इस अवसर पर संस्थान के विभागाध्यक्ष और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए. एन. सिंह, डॉ. अनंत बहादुर सिंह, डॉ. डी. पी. सिंह, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. पी. एम. सिंह और डॉ. सुदर्शन मौर्य सहित कई वैज्ञानिक और फसल प्रजनक उपस्थित रहे. कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. इन्दीवर प्रसाद ने सभी अतिथियों और साझेदार संस्थाओं का धन्यवाद ज्ञापित किया.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today