लकी ड्रॉ में मिलेगा ट्रैक्टर और चारा मशीनउत्तर प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना में बदलाव किया गया है. योगी सरकार के तहत राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने योजना में दिए जाने वाले उपहारों की सूची में संशोधन किया है. अब किसानों को लकी ड्रॉ के जरिए टीवी जैसी चीजों के बजाय खेती और पशुपालन में काम आने वाले उपकरण भी दिए जाएंगे. इसका उद्देश्य किसानों को ऐसे संसाधन उपलब्ध कराना है, जिनसे खेती का काम आसान हो और समय और मेहनत की बचत हो सके.
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, योजना के तहत दिए जाने वाले कुछ उपहारों की जगह कृषि उपयोगी मशीनें शामिल की जा रही हैं. इसके लिए गठित समिति ने उपहारों की उपयोगिता और वितरण व्यवस्था पर विचार किया. समिति की सिफारिशों के आधार पर यह बदलाव किया गया है.
मुख्यमंत्री कृषक उपहार योजना के तहत पहले दूसरे उपहार के रूप में 43 इंच का एलईडी टीवी दिया जाता था. अब इसकी जगह तीन हॉर्स पावर की चारा काटने वाली मशीन दी जाएगी. इस मशीन की अनुमानित कीमत 30 हजार रुपये रखी गई है. प्रत्येक संभाग में ऐसे तीन उपहार देने का प्रावधान है. इस बदलाव से पशुपालन करने वाले किसानों को फायदा मिल सकता है. चारा काटने की मशीन से पशुओं के लिए चारा तैयार करना आसान होगा और किसानों की मेहनत भी कम होगी.
योजना में आठ हॉर्स पावर का पंपिंग सेट पहले की तरह शामिल रहेगा. इसकी अनुमानित कीमत 55 हजार रुपये प्रति उपहार है. प्रत्येक संभाग में ऐसे दो उपहार दिए जाने का प्रावधान है. इसके अलावा पावर स्प्रेयर भी उपहारों की सूची में शामिल है. इसकी अनुमानित कीमत पांच हजार रुपये प्रति उपहार है. पावर स्प्रेयर का इस्तेमाल फसलों पर कीटनाशक या अन्य कृषि घोल के छिड़काव के लिए किया जाता है.
योजना के तहत अलग-अलग श्रेणियों में दिए जाने वाले उपहारों की सूची में भी बदलाव किया गया है. इसमें ये उपहार शामिल किए गए हैं:
- पहला उपहार: 35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर.
- दूसरा उपहार: पहले शामिल कुछ उपकरणों की जगह 20 हॉर्स पावर से कम क्षमता वाला छोटा ट्रैक्टर.
- तीसरा उपहार: पावर टिलर या रीपर जैसे उपकरणों के स्थान पर 100 सीसी क्षमता वाली मोटरसाइकिल.
- चौथा उपहार: सोलर पावर पैक संयंत्र.
समिति की सिफारिश के अनुसार, पहले उपहार के रूप में ट्रैक्टर को पहले की तरह बनाए रखा गया है. वहीं, अन्य उपहारों की खरीद और वितरण व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया गया है. योजना के छमाही और बंपर ड्रॉ में दिए जाने वाले उपहारों की उपयोगिता को ध्यान में रखकर संशोधित व्यवस्था तैयार की जा रही है.
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद किसानों को कृषि उपज की क्वालिटी बनाए रखने में मदद देने के लिए फ्री प्लास्टिक कैरेट भी उपलब्ध कराएगी. इन कैरेट का इस्तेमाल फल और सब्जियों की तुड़ाई और परिवहन के दौरान किया जा सकता है. इससे उपज को संभालने में आसानी होगी और उसके खराब होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है.
मंडी परिषद ने मंडियों की श्रेणी के हिसाब से किसानों को प्लास्टिक कैरेट देने का लक्ष्य तय किया है. इसके तहत 'क' श्रेणी की मंडियों में 500 किसानों को चार-चार कैरेट यानी कुल 2,000 कैरेट दिए जाएंगे. वहीं, 'ख' श्रेणी की मंडियों में 250 किसानों को कुल 1,000 कैरेट, 'ग' श्रेणी की मंडियों में 200 किसानों को 800 कैरेट और 'घ' श्रेणी की मंडियों में 150 किसानों को 600 कैरेट दिए जाएंगे. इस तरह कुल 1,100 किसानों को चार-चार कैरेट देने की योजना है, जिसके तहत कुल 4,400 प्लास्टिक कैरेट दिए जाएंगे.
योजना के तहत फल और सब्जियों की तुड़ाई के समय से ही प्लास्टिक कैरेट का इस्तेमाल करने वाले किसानों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था है. कैरेट के वितरण का लक्ष्य संबंधित मंडी समितियों में किसानों की संख्या के आधार पर तय किया गया है,
मंडी परिषद ने कृषि की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी राहत से जुड़ा बदलाव किया है. मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालय, कृषि संस्थान और कृषि महाविद्यालय से ग्रेजुएशन करने वाले विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई है. इसके अलावा मंडी परिषद की योजनाओं में व्यापारियों को प्लास्टिक शीट देने और मंडी परिसर में दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था भी शामिल है.
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