खेती को लाभकारी बनाने के लिए योगी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, 8 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ

खेती को लाभकारी बनाने के लिए योगी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, 8 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ

Agriculture News: चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. अभियान के दौरान संबंधित धाराओं के तहत शत-प्रतिशत निस्तारण करना होगा.

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खेती को लाभकारी बनाने के लिए योगी सरकार ने उठाया बड़ा कदम, 8 जिलों के किसानों को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Photo-Social Media)

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने खेती को लाभकारी बनाने और किसानों को चकबंदी संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने और भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इससे किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिल सकेगा. प्रदेश के 8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है, जबकि वर्षों से लंबित मामलों को निपटाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विशेष अभियान चलाकर निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों का निस्तारण किया जाएगा.

18 साल से चकबंदी में फंसे गांवों को मिली राहत

चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने लंबे समय से लंबित चकबंदी के मामलों में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं. इसी क्रम में चार जनपदों के छह गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है. इनमें उन्नाव के अजगवां, पिडना, सादाबाद व बरेली का मगरासा गांव शामिल हैं. इन गांवों में पिछले 12 वर्षों से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही थी. इसके अलावा बुलंदशहर के बराल गांव में सात वर्ष और बांदा के काजीपुर (गिरवान) गांव में दो वर्ष से चकबंदी की प्रक्रिया लंबित थी.

डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने बताया कि इन गांवों में ग्राम विकास योजना के तहत कार्य होने, नदी के कटान से प्रभावित होने, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होने, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होने, गुटबंदी और दलगत विवाद होने जैसे कारणों से प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आ रही थीं. विशेष प्रयासों के बावजूद कार्य आगे नहीं बढ़ पाने के कारण इन्हें चकबंदी प्रक्रिया से अलग करने का निर्णय लिया गया.

8 जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी पूरी

उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित मामलों को निस्तारित करते हुए आठ जनपदों के 11 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. इनमें महराजगंज का बैसार गांव शामिल है, जहां 18 वर्षों से चकबंदी चल रही थी. वहीं बुलंदशहर के भीकमपुर और चित्रकूट के सिकरी सालिस गांव में 12 वर्षों से प्रक्रिया लंबित थी. इन तीनों गांवों में चकबंदी पूरी की गई. इसके अलावा बस्ती के औराडीहा और प्रतापगढ़ के देवलहा गांव में दो वर्षों से चल रही चकबंदी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई. इन गांवों में उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत प्रक्रिया समाप्त की गई.

15 अक्टूबर से चलेगा विशेष अभियान

चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने सभी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक निर्विवाद उत्तराधिकार और नामांतरण के मामलों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. अभियान के दौरान संबंधित धाराओं के तहत शत-प्रतिशत निस्तारण करना होगा.

अधिकारियों को निदेशालय को प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना होगा कि निर्धारित समयसीमा से अधिक अवधि का कोई भी निर्विवाद उत्तराधिकार या नामांतरण का मामला जनपद में लंबित नहीं है. अभियान की अवधि के बाद भी तय समयसीमा से अधिक समय तक लंबित रहने वाले निर्विवाद उत्तराधिकार के मामलों में संबंधित चकबंदी अधिकारी और चकबंदीकर्ता की पहचान कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं.

3 साल से पुराने वादों का प्राथमिकता पर निस्तारण

डॉ. हृषिकेश के मुताबिक, चकबंदी न्यायालयों में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित वादों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश भी दिए गए हैं. सभी उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारियों को इस कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है. लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी.

इसके साथ ही अधिकारियों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी मैनुअल के प्रस्तर 541 के अनुसार अपने न्यायालयों, अधीनस्थ चकबंदी न्यायालयों, कार्यालयों और चकबंदी अभिलेखों के बस्तों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं. निरीक्षण संबंधी टिप्पणी 15 दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होगी.

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