झारखंड में खेती को मिलेगा बढ़ावा, 1,500 किसानों के बीच पहुंचे शिवराज सिंह चौहान

झारखंड में खेती को मिलेगा बढ़ावा, 1,500 किसानों के बीच पहुंचे शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रांची में ICAR-IIAB की कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया और 119 करोड़ रुपये के नए गेस्ट हाउस की नींव रखी. उन्होंने झारखंड के किसानों को बेहतर बीज, नई कृषि तकनीक, संतुलित खाद और एकीकृत खेती अपनाने की सलाह दी. कार्यक्रम में करीब 1,500 किसानों ने हिस्सा लिया.

Advertisement
झारखंड में खेती को मिलेगा बढ़ावा, 1,500 किसानों के बीच पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने रांची में शुरू कीं कई नई सुविधाएं

झारखंड के किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना जरूरी है. किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सही खाद और नई कृषि तकनीक मिले, तो फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इसी दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रांची के गढ़खटंगा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (IIAB) में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने किसानों तक कृषि वैज्ञानिकों की नई खोज और तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया. साथ ही, संस्थान में नए गेस्ट हाउस के निर्माण की आधारशिला भी रखी.

रांची में शुरू हुईं कई नई सुविधाएं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-IIAB में प्रशासनिक और स्कूल भवन, बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय हॉल, जयपाल सिंह मुंडा खेल परिसर और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया. इन सुविधाओं से संस्थान में पढ़ाई, कृषि अनुसंधान, खेल और नई तकनीकों पर काम करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा, संस्थान में एक नए गेस्ट हाउस के निर्माण की आधारशिला रखी गई. इस परियोजना पर 119 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इन सुविधाओं का उद्देश्य संस्थान की क्षमता बढ़ाना और कृषि अनुसंधान से जुड़े कामों को आगे बढ़ाना है.

किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सलाह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को खेती में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना चाहिए. उन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के इस्तेमाल, संतुलित मात्रा में खाद डालने और खेती के नए तरीकों को अपनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि झारखंड की मिट्टी, मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर खेती की तकनीक विकसित की जानी चाहिए. हर जगह की जमीन और मौसम एक जैसे नहीं होते, इसलिए किसानों को ऐसी तकनीक अपनानी चाहिए जो उनके खेत और इलाके के लिए सही हो.

मंत्री ने बेहतर बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत भी बताई. उन्होंने कहा कि कृषि संस्थानों में होने वाले शोध का फायदा तभी है, जब उससे मिलने वाली जानकारी और तकनीक किसानों के खेतों तक पहुंचे.

पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीक भी जरूरी

शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक ज्ञान की सराहना की. उन्होंने कहा कि यहां खेती से जुड़ी पुरानी परंपराएं और स्थानीय अनुभव महत्वपूर्ण हैं. हालांकि, आज खेती के सामने कई नई चुनौतियां हैं, जिनका सामना करने के लिए वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीक की मदद लेना जरूरी है. उन्होंने ICAR-IIAB को कृषि अनुसंधान, नए प्रयोगों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण संस्थान बताया. उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों के बीच जाकर उन्हें नई तकनीकों के बारे में जानकारी दें. किसानों को जागरूक करने और खेतों में नई तकनीक अपनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए.

सब्जी, अनाज और पशुपालन को साथ लेकर चलने पर जोर

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को एक ही तरह की खेती पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग कृषि गतिविधियों को अपनाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि किसान अनाज और सब्जियों की खेती के साथ पशुपालन को भी बढ़ावा दे सकते हैं. एकीकृत खेती यानी खेती के साथ पशुपालन और दूसरी कृषि गतिविधियों को जोड़ने से किसानों को आमदनी के अलग-अलग साधन मिल सकते हैं. इससे किसी एक फसल के खराब होने या उसकी कीमत गिरने पर होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने खाद के संतुलित इस्तेमाल पर भी जोर दिया. फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद डालने से पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. इससे मिट्टी की सेहत बनाए रखने और फसल की अच्छी पैदावार हासिल करने में मदद मिल सकती है.

किसानों तक पहुंचनी चाहिए सरकारी योजनाओं की मदद

शिवराज सिंह चौहान ने किसान कल्याण से जुड़ी सरकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचना चाहिए, ताकि जरूरतमंद किसानों को उनका फायदा मिल सके. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और संस्थानों से किसानों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया. किसानों को सही समय पर जानकारी, बीज और खेती से जुड़ी जरूरी सुविधाएं मिलना महत्वपूर्ण है. इसके लिए शोध संस्थानों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए.

किसानों की बैठक में 1,500 किसानों ने हिस्सा लिया

ICAR-IIAB की ओर से अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) और जनजातीय उपयोजना (TSP) के तहत रबी सीजन से पहले किसान गोष्ठी और कृषि सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ जिलों के करीब 1,500 किसानों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के बारे में जानकारी देना था. इस दौरान किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और नीति बनाने वाले अधिकारियों को एक मंच पर लाया गया, ताकि खेती से जुड़ी समस्याओं पर सीधे बातचीत हो सके.

रबी सीजन की शुरुआत से पहले ऐसी गोष्ठियों से किसानों को फसल की तैयारी, बीज के चुनाव, खाद के सही इस्तेमाल और खेती की बेहतर तकनीकों के बारे में जानकारी मिल सकती है. साथ ही, कृषि वैज्ञानिकों को भी किसानों की जरूरतों और खेतों में आने वाली समस्याओं को समझने का मौका मिलता है.

किसानों की तरक्की के लिए शोध को खेतों तक पहुंचाना जरूरी

झारखंड में खेती को मजबूत बनाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, संतुलित खाद, स्थानीय मौसम के अनुसार तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है. रांची स्थित ICAR-IIAB में नई सुविधाओं की शुरुआत और किसान गोष्ठी का आयोजन इसी दिशा में किए गए प्रयासों का हिस्सा है. अब इन प्रयासों का वास्तविक फायदा तभी मिलेगा, जब कृषि अनुसंधान से मिलने वाली जानकारी किसानों के खेतों तक पहुंचे और किसान उसे अपनी जरूरत के अनुसार अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकें.

ये भी पढ़ें: 

उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर, जल्द होगी उत्तर-पूर्वी मॉनसून की एंट्री
मंडियों से लेकर खेतों तक पड़ताल, महाराष्ट्र में प्याज के गिरते दाम और नुकसान पर बड़ा अभियान शुरू

POST A COMMENT