
मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली अनूठी 440 मेगावॉट मुरैना सोलर प्लस बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया है. इस परियोजना में महज ₹2.70 प्रति यूनिट की प्रतिस्पर्धी दर प्राप्त हुई है, जो इस श्रेणी की परियोजनाओं में अब तक की देश की सबसे कम दर मानी जा रही है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि को मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए युगांतरकारी बताते हुए कहा कि राज्य अब केवल अक्षय ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, बल्कि ऊर्जा भंडारण और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में भी नई मिसाल कायम कर रहा है.
भोपाल में आयोजित पीपीए हस्ताक्षर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुरैना की सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज परियोजना भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने वाली अभिनव पहल है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक ही बैटरी का प्रतिदिन दो बार उपयोग किया जाएगा, जिससे ऊर्जा भंडारण की लागत कम होगी और बैटरी की उत्पादकता बढ़ेगी.
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार स्वच्छ, सस्ती और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है और यह परियोजना उसी संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
कार्यक्रम के दौरान 500 मेगावॉट नीमच और 450 मेगावॉट शाजापुर सौर पार्कों का भी लोकार्पण किया गया. कुल 950 मेगावॉट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता राष्ट्र को समर्पित होने से मध्यप्रदेश की अक्षय ऊर्जा क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है.
इन परियोजनाओं से भारतीय रेल और दिल्ली मेट्रो जैसी संस्थाओं को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति की जा रही है.
केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है. उन्होंने कहा कि राज्य लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है और गुजरात व उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों से भी तेज़ गति से प्रगति कर रहा है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले सूर्य ऊर्जा की अपार संभावनाओं को पहचाना और आज देश सौर ऊर्जा उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो रहा है.उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रदेश की सभी सरकारी इमारतों को एक वर्ष के भीतर सोलराइज करने का भी आग्रह किया.
मुरैना सोलर प्लस बैटरी स्टोरेज परियोजना के लिए आयोजित वैश्विक निविदा प्रक्रिया में देश-विदेश की 16 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया.करीब 12 घंटे तक चली प्रतिस्पर्धी ई-बोली के बाद ₹2.70 प्रति यूनिट का ऐतिहासिक टैरिफ सामने आया, जो इस क्षेत्र में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बन गया.
राज्य सरकार अब केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ऊर्जा भंडारण को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का प्रमुख आधार बना रही है. मुख्यमंत्री द्वारा दावोस में घोषित विज़न के अनुरूप 4 घंटे और 6 घंटे की बैटरी स्टोरेज आधारित परियोजनाओं की निविदाएँ जारी की जा चुकी हैं. वहीं देश की पहली 24×7 राउंड-द-क्लॉक अक्षय ऊर्जा परियोजना की दिशा में भी मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है.
प्रदेश में 4,022 मेगावॉट फीडर सौर ऊर्जीकरण कार्यक्रम के तहत भी ₹2.40 प्रति यूनिट की रिकॉर्ड न्यूनतम दर प्राप्त हुई है.इस योजना से किसानों को दिन के समय गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी, जिससे कृषि कार्य अधिक सुगम होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
मध्यप्रदेश सरकार ने आगामी वर्षों में 20 हजार मेगावॉट से अधिक अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है.राज्य में सौर, पवन, बैटरी ऊर्जा भंडारण और पम्प्ड स्टोरेज की कई बड़ी परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में हैं.
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि रोजगार, निवेश, आधारभूत संरचना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी.मध्यप्रदेश हरित ऊर्जा की राजधानी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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