बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति 2026 को मंजूरीबिहार में गन्ना आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गन्ना उद्योग विभाग ने एक बड़ा निर्णय लिया है. इसके तहत बिहार सरकार ने बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बीते दिनों आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महत्वाकांक्षी नीति को मंजूरी दी गई. वहीं, गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन चुका है. गन्ना क्षेत्र के विस्तार के लिए मॉडर्न शुगर काम्प्लेक्स वाली चीनी मिल, डिस्टीलरी, सह-विद्युत उत्पादन और कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) इकाइयों की स्थापना और क्षमता विस्तार के लिए एकीकृत और व्यापक प्रोत्साहन नीति लागू की गई है.
बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति लागू होने के बाद अब इस नीति के अंतर्गत 5000 टीसीडी क्षमता वाली नई चीनी मिल की स्थापना पर निवेशकों को पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. इसी प्रकार, 3500 टीसीडी क्षमता वाली नई चीनी मिल की स्थापना पर पांच वर्षों में 70 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा. वहीं, कार्यरत चीनी मिलों की क्षमता में न्यूनतम 1000 टीसीडी के विस्तार पर 15 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी और इससे अधिक क्षमता विस्तार पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अतिरिक्त प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराया जाएगा.
इस नीति के अंतर्गत राज्य सरकार नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए गन्ना उद्योग विभाग अथवा बिहार राज्य चीनी निगम की उपलब्ध भूमि पर 1 रुपये की टोकन राशि पर 30 वर्षों की लीज के लिए 40 एकड़ तक भूमि उपलब्ध कराएगी. साथ ही भूमि खरीद पर देय निबंधन शुल्क और स्टांप शुल्क की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति (रीम्बर्समेंट) और उत्पादित चीनी पर पांच वर्षों तक एसजीएसटी की पूर्ण प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की गई है.
राज्य सरकार की ओर से बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति 2026 के तहत कार्यरत चीनी मिलों के आधुनिकीकरण, अपग्रेडेशन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रिफाइनरी में बदलने के लिए पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत या अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा डिस्टीलरी और इथेनॉल इकाइयों की स्थापना और क्षमता विस्तार के लिए प्लांट और मशीनरी निवेश पर 15 प्रतिशत या अधिकतम 5 करोड़ रुपये की सहायता, लोन पर ब्याज अनुदान और उत्पादित इथेनॉल पर एसजीएसटी की शत-प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी जाएगी. साथ ही सह-विद्युत उत्पादन परियोजनाओं और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांटों को भी नीति के तहत विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा. इससे राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग का रास्ता साफ होगा.
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