मध्यप्रदेश में भूमि रिकॉर्ड होंगे पूरी तरह डिजिटल, 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख होंगे ऑनलाइन; जुलाई से 11 और जिलों में शुरू होगा अगला चरण

मध्यप्रदेश में भूमि रिकॉर्ड होंगे पूरी तरह डिजिटल, 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख होंगे ऑनलाइन; जुलाई से 11 और जिलों में शुरू होगा अगला चरण

मध्यप्रदेश में भूमि रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है. पहले चरण में जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में स्कैनिंग पूरी हो चुकी है, जबकि जुलाई 2026 से भोपाल और सागर संभाग के 11 जिलों में अगला चरण शुरू होगा.

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मध्यप्रदेश में भूमि रिकॉर्ड होंगे पूरी तरह डिजिटल, 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख होंगे ऑनलाइन; जुलाई से 11 और जिलों में शुरू होगा अगला चरण

मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिकों के लिए सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है.डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत राज्यभर के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है.इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी रिकॉर्ड ऑनलाइन, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध कराना है.

इस योजना के पहले चरण में जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में करीब 2.70 करोड़ दस्तावेजों की 100 प्रतिशत स्कैनिंग पूरी हो चुकी है. वहीं अब भोपाल और सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत की जाएगी.

15 करोड़ भू-अभिलेख होंगे डिजिटल

राज्य सरकार के अनुसार, पुराने भू-अभिलेखों के संरक्षण और उन्हें आधुनिक स्वरूप देने के लिए दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली (Document Management System) और डीबीईएस (DBES) सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं.इसके माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भूमि रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन किया जाएगा, जिससे वर्षों पुराने दस्तावेज भी सुरक्षित रूप से संरक्षित रहेंगे.

पहले भी हो चुका है बड़ा काम

राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी, जिसे 1 अप्रैल 2016 से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के रूप में पुनर्गठित किया गया.

इसके तहत—

  • फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3.18 करोड़ दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी की गई।
  • फेज-2 (2021-22) में करीब 2.39 करोड़ दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन किया गया।
  • अब फेज-3 में लगभग 15 करोड़ भू-अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है।

जिला स्तर पर बनाए गए आधुनिक स्कैनिंग सेंटर

परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले में अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं.यहां पुराने दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है.

रिकॉर्ड की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण करेंगे. अंतिम सत्यापन के बाद सभी दस्तावेज भूलेख पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए जाएंगे.

पहले चरण में मिली बड़ी सफलता

योजना के पहले चरण में जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी कर ली गई है. इन जिलों में अब डेटा एंट्री और रिकॉर्ड सत्यापन का कार्य लगातार जारी है.

जुलाई से 11 जिलों में शुरू होगा दूसरा चरण

सरकार ने भोपाल और सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से डिजिटाइजेशन कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है.इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके.

किसानों और आम नागरिकों को होगा सीधा लाभ

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से नागरिकों को भूमि संबंधी रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.लोग अपने भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेंगे.इससे न केवल राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भूमि विवादों में कमी आने, रिकॉर्ड के सुरक्षित संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने में भी मदद मिलेगी.

राज्य सरकार का मानना है कि डिजिटल भूमि अभिलेख प्रणाली लागू होने से राजस्व विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और आम नागरिकों को अधिक तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं मिल सकेंगी.

 

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