Bihar Sugar Mills: गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर, 7 महीने में शुरू होंगी नवादा, मोतीपुर और सासामूसा चीनी मिलें

Bihar Sugar Mills: गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर, 7 महीने में शुरू होंगी नवादा, मोतीपुर और सासामूसा चीनी मिलें

बिहार सरकार ने बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की कवायद तेज कर दी है. नवादा, मोतीपुर और गोपालगंज के सासामूसा में चीनी मिलों को मार्च 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार निवेश नीति में बदलाव, जलजमाव और नीलगाय जैसी समस्याओं के समाधान पर भी काम कर रही है ताकि गन्ना उद्योग को मजबूती मिल सके.

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गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर, 7 महीने में शुरू होंगी नवादा, मोतीपुर और सासामूसा चीनी मिलेंबिहार में शुरू होंगी चीनी मिलें

बिहार में चीनी उद्योग को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने और नए निवेश आकर्षित करने की कवायद तेज कर दी गई है. इसी कड़ी में नवादा के वारिसलीगंज, मुजफ्फरपुर के मोतीपुर और गोपालगंज के सासामूसा में चीनी मिलों को शुरू करने की तैयारी तेजी से चल रही है.

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि इन तीनों परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है और सरकार का लक्ष्य अगले सात महीनों में इन्हें चालू करना है. अधिकारियों के अनुसार मार्च 2027 तक तीनों चीनी मिलों के संचालन की योजना है.

तीन जिलों में चीनी मिल परियोजनाओं पर तेज हुआ काम

बैठक में बताया गया कि सासामूसा चीनी मिल परियोजना को लेकर अदालत के आदेश के बाद निवेशकों के साथ बैठक कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. वहीं, हथुआ राज की जमीन के ट्रांसफर का काम भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

मोतीपुर चीनी मिल की जमीन वापस लेने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है. इसके लिए वित्त विभाग से प्राप्त राशि को नियमों के अनुसार इंडियन पोटाश लिमिटेड को देने का फैसला लिया गया है. सरकार का दावा है कि तीनों परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए जरूरी प्रशासनिक और वित्तीय कदम उठाए जा रहे हैं.

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीति में बदलाव

बिहार सरकार गन्ना आधारित उद्योगों और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों में निवेश बढ़ाने के लिए निवेश नीति में संशोधन की तैयारी कर रही है. गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 की गाइडलाइन में जमीन आवंटन और परियोजना मूल्यांकन से जुड़े प्रावधानों को सरल बनाने पर विचार किया गया है.

सरकार 'कमिटेड अप्रूवल' व्यवस्था लागू करने पर भी जोर दे रही है, जिससे निवेशकों को बार-बार मंजूरी के लिए इंतजार न करना पड़े. बैठक में वर्द्धन सीबीजी के प्रबंध निदेशक अमित कुमार सिंह ने सुझाव दिया कि परियोजना मूल्यांकन में बिहार के निवेशकों को अतिरिक्त अंक दिए जाएं, ताकि स्थानीय उद्यमियों को भी प्राथमिकता मिल सके.

जलजमाव और नीलगाय की समस्या पर फोकस

सरकार का मानना है कि केवल चीनी मिल स्थापित करना ही काफी नहीं है, बल्कि गन्ना उत्पादन से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है. इसी वजह से बैठक में जलजमाव और नीलगाय के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई.

गन्ना उगाने वाले क्षेत्रों में जलजमाव की समस्या फसल उत्पादन को प्रभावित करती है और मिलों को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पाता. इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग को बड़े स्तर की परियोजना का डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया है.

वहीं, नीलगायों से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कृषि विभाग को नई तकनीक आधारित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं.

किसानों और रोजगार को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि नई चीनी मिलों के शुरू होने से गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए स्थानीय बाजार मिलेगा. इससे परिवहन लागत कम होगी और किसानों को समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी.

साथ ही, इन मिलों के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और गन्ना आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. सरकार को उम्मीद है कि चीनी मिलों के पुनर्जीवन से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी.

यदि सभी योजनाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो मार्च 2027 तक नवादा, मोतीपुर और सासामूसा में चीनी मिलों की सीटी फिर से गूंज सकती है, जिससे बिहार के गन्ना किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलेगा.

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