CM सम्राट चौधरी ने केंद्र से मांगा बड़ा फंड (Photo ITG)बिहार में सिंचाई और बाढ़ से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाएं लंबे समय से मंजूरी और फंड का इंतजार कर रही हैं. इन्हें जल्द आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात की. बैठक में उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे. इस दौरान बिहार की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने, बाढ़ से बचाव और लंबित परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई.
मुख्यमंत्री ने कोसी-मेची लिंक परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने की मांग की. करीब 3,652 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी का इस्तेमाल करके उत्तर बिहार में सिंचाई की सुविधा बढ़ाना है. परियोजना के पहले चरण के लिए वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में कुल 965.41 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन अभी तक करीब 157 करोड़ रुपये ही मिले हैं. मुख्यमंत्री ने केंद्र से बाकी राशि जल्द जारी करने और परियोजना के दूसरे चरण की डीपीआर को मंजूरी देने की मांग की. राज्य सरकार ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी कुल 16,339 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की डीपीआर केंद्र को भेजी है. इनमें से अभी केवल दो परियोजनाओं को मंजूरी मिली है. मुख्यमंत्री ने सिकरहना दायां तटबंध जैसी योजनाओं के लिए भी केंद्र का हिस्सा जल्द जारी करने की मांग की.
बैठक में पश्चिमी कोसी नहर के विस्तार, मरम्मत और आधुनिकीकरण पर भी चर्चा हुई. इस परियोजना के लिए 8,338 करोड़ रुपये की डीपीआर केंद्र को भेजी गई है. मंजूरी का इंतजार किए बिना बिहार सरकार ने अपने खर्च से इसके पहले चरण का काम शुरू कर दिया है, जिस पर करीब 3,484 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने केंद्र से पूरी परियोजना को मंजूरी देने और आर्थिक मदद देने की मांग की. इसके साथ ही बिहार में बाढ़ प्रबंधन के लिए मिलने वाली राशि बढ़ाने की भी मांग की गई. मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार का करीब 73 फीसदी हिस्सा बाढ़ से प्रभावित होता है. हर साल गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों के कारण राज्य के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनती है. ऐसे में बाढ़ से बचाव की योजनाओं को जल्द पूरा करना जरूरी है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार से अगले केंद्रीय बजट में बिहार की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शामिल करने की मांग की. इनमें इंद्रपुरी जलाशय योजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना और सारण बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी परियोजना के पहले चरण को शामिल करने की बात कही गई. इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिहार के कई जिलों में सिंचाई की सुविधा बेहतर हो सकती है. इससे किसानों को खेतों के लिए पानी मिलने में मदद मिलेगी और फल्गु नदी में भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकेगी. मुख्यमंत्री ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पटना में ही बनाए रखने की मांग भी केंद्र के सामने रखी.
बैठक में नदियों में गाद जमा होने की समस्या पर भी बात हुई. मुख्यमंत्री ने फरक्का बराज और भारत-बांग्लादेश जल संधि से जुड़ी वजहों के कारण नदियों में गाद जमा होने, नदी की धारा बदलने और बाढ़ का खतरा बढ़ने की समस्या का स्थायी समाधान खोजने की मांग की. इसके लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने और अलग फंड तैयार करने का सुझाव दिया गया. इसके अलावा नेपाल से जुड़ी कोसी हाई डैम, कमला बांध और बागमती बांध जैसी परियोजनाओं के सर्वे और डीपीआर का काम तेज करने की भी मांग की गई. इन परियोजनाओं पर भारत और नेपाल के बीच सहयोग जरूरी है. बिहार सरकार चाहती है कि इनसे जुड़े संयुक्त परियोजना कार्यालयों में राज्य की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाए.
बिहार हर साल कहीं बाढ़ तो कहीं पानी की कमी की समस्या से जूझता है. ऐसे में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की योजनाएं राज्य के लिए बेहद जरूरी हैं. अगर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इन परियोजनाओं को जल्द मंजूरी और पर्याप्त फंड उपलब्ध कराते हैं, तो उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा कम करने के साथ-साथ खेती के लिए पानी की सुविधा भी बेहतर हो सकती है. इसका सीधा फायदा किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलने की उम्मीद है.
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