बिहार में जमीन सर्वे का काम जारी हैबिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने साफ कहा है कि सरकारी जमीन की पहचान और लंबित राजस्व काम में ढिलाई अब नहीं चलेगी. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जिलों के अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अंचल अधिकारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि खराब प्रदर्शन और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी. जनता से जुड़े म्यूटेशन, मापी और अतिक्रमण के मामले बेवजह लटकाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी.
मंत्री ने कहा कि सरकारी जमीन की पहचान सरकार की बड़ी प्राथमिकता है. इस काम में कोताही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय होगी. पूर्णिया, बेगूसराय, वैशाली, सीतामढ़ी, भोजपुर, कैमूर, कटिहार, औरंगाबाद, सहरसा और भागलपुर को इस कार्य में तुरंत तेजी लाने को कहा गया. बैठकों से काम नहीं चलेगा, जमीन पर नतीजा दिखना चाहिए. बिना खाता-खेसरा वाली जमाबंदी दर्ज ना रहे, यह निर्देश भी दिया गया. सरकारी भूमि से जुड़े म्यूटेशन को सर्वोच्च प्राथमिकता पर निपटाने को कहा गया. विभाग का रुख है कि राज्य की संपत्ति का रिकॉर्ड साफ रहे और अतिक्रमण या गड़बड़ी छिप ना सके.
सचिव जय सिंह ने लंबित मापी का बैकलॉग खत्म करने को कहा. प्रत्येक अमीन को महीने में कम से कम 20 मापी मामले निपटाने का निर्देश दिया गया. अभियान बसेरा-02 में पात्र लोगों की पहचान जारी रहे और सर्वे के आंकड़े अपडेट कर 15 सितंबर तक प्रमाणपत्र सॉफ्टवेयर पर अपलोड किए जाएं. ई-मापी में जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, पश्चिम चंपारण और पूर्वी चंपारण का प्रदर्शन बेहतर रहा. अभियान बसेरा-02 में सहरसा, जमुई, बेगूसराय, पटना और कैमूर शीर्ष पर बताए गए. फार्मर रजिस्ट्रेशन के लंबित अप्रूवल भी शून्य करने को कहा गया, ताकि किसानों से जुड़ी सेवाएं अटकी ना रहें.
डिफेक्ट चेक में भोजपुर, सुपौल, नवादा, शिवहर और शेखपुरा आगे रहे. म्यूटेशन में बेगूसराय, दरभंगा, सारण, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर का प्रदर्शन बेहतर पाया गया. परिमार्जन प्लस की डिजिटल जमाबंदी में बांका, कैमूर, रोहतास, शेखपुरा और औरंगाबाद अच्छे रहे. छूटी जमाबंदियों के निष्पादन में कैमूर, पटना, रोहतास, सारण और मधुबनी का नाम आया. बाकी जिलों को सुधार का निर्देश मिला. आवेदन खारिज करते समय ठोस कारण लिखने और कमी के कागजात आवेदक को बताने को कहा गया, ताकि लोग बार-बार दफ्तर के चक्कर ना काटें.
जन शिकायत और अतिक्रमण वादों पर मंत्री सख्त दिखे. उन्होंने कहा कि लोगों को कार्यालय घुमाना अब बर्दाश्त नहीं होगा. भूमि अतिक्रमण के मामलों को ऑफलाइन निपटाने वाले अरवल, बांका, बेगूसराय, बक्सर, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, कैमूर, कटिहार, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, नवादा और रोहतास के अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए. राजस्व महाअभियान के मामलों को भी प्राथमिकता से पूरा करने को कहा गया. बैठक में अपर सचिव महेंद्र पाल समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे. संदेश साफ है कि समय-सीमा टूटी तो विभागीय कार्रवाई होगी. जमीन के काम अब कागजी समीक्षा तक नहीं रुकेंगे, नतीजा मांगा जाएगा.
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