अब डीजल नहीं, सूरज करेगा खेतों की सिंचाई! PM-KUSUM से किसानों को मिलेगा बंपर अनुदान

अब डीजल नहीं, सूरज करेगा खेतों की सिंचाई! PM-KUSUM से किसानों को मिलेगा बंपर अनुदान

राजस्थान के किसानों के लिए PM-KUSUM योजना के तहत सोलर पंप लगाने पर 60% तक अनुदान दिया जा रहा है. इससे डीजल पर होने वाला खर्च कम होगा और सिंचाई आसान बनेगी. अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को प्रति पंप 45 हजार रुपये का अतिरिक्त अनुदान मिलेगा. योजना में 3 से 10 HP तक सोलर पंप लगाए जा सकते हैं.

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अब डीजल नहीं, सूरज करेगा खेतों की सिंचाई! PM-KUSUM से किसानों को मिलेगा बंपर अनुदानराजस्थान के किसानों की बल्ले-बल्ले!

राजस्थान में खेती की सिंचाई को आसान और सस्ता बनाने के लिए किसानों को सौर ऊर्जा पंप लगाने पर सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी जा रही है. प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (PM-KUSUM) के कंपोनेंट-बी के तहत ऑफ-ग्रिड सोलर पंप परियोजना चलाई जा रही है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य डीजल से चलने वाले सिंचाई पंपों पर किसानों की निर्भरता कम करना और खेती में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है.

डीजल के खर्च से मिलेगी राहत

खेती में सिंचाई के लिए डीजल पंप का इस्तेमाल करने वाले किसानों को हर सीजन में ईंधन पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है. डीजल की कीमत बढ़ने पर खेती की लागत भी बढ़ जाती है. ऐसे में सोलर पंप किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है. PM-KUSUM योजना के तहत ऐसे किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप लगाने के लिए अनुदान दिया जाता है. इससे किसान सूरज की रोशनी से पंप चलाकर खेतों की सिंचाई कर सकते हैं. इससे डीजल का खर्च कम होगा और खेती की लागत घटाने में भी मदद मिलेगी.

सोलर पंप की लागत पर 60% तक अनुदान

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि सोलर पंप की आधार लागत का 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. बाकी 40 प्रतिशत राशि किसान को खुद देनी होगी. किसान अपनी हिस्सेदारी में से 30 प्रतिशत तक राशि बैंक से ऋण के रूप में भी ले सकता है. इससे किसानों के लिए सोलर पंप लगाना पहले की तुलना में आसान हो जाता है. खासकर उन किसानों को इसका फायदा मिल सकता है, जिनके खेतों में सिंचाई के लिए बिजली का कनेक्शन नहीं है और वे डीजल पंप पर निर्भर हैं.

SC और ST किसानों को अतिरिक्त मदद

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए इस योजना में अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान है. ऐसे किसानों को प्रति सोलर पंप 45,000 रुपये का अतिरिक्त अनुदान राज्य मद से दिया जाएगा. इससे इन वर्गों के किसानों के लिए सोलर पंप लगवाने का खर्च और कम हो सकता है.

3 से 10 HP तक के सोलर पंप लगाए जा सकते हैं

योजना के तहत किसान 3 HP, 5 HP, 7.5 HP और 10 HP तक क्षमता वाले सोलर पंप संयंत्र लगवा सकते हैं. हालांकि, सरकारी अनुदान अधिकतम 7.5 HP क्षमता तक ही दिया जाएगा. यानी 10 HP का पंप लगाने की स्थिति में अतिरिक्त क्षमता का खर्च किसान को अपनी ओर से उठाना पड़ सकता है.

किस किसान को मिलेगा योजना का लाभ?

PM-KUSUM सोलर पंप योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास सिंचाई के लिए कृषि बिजली कनेक्शन नहीं होना चाहिए. साथ ही वह सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पंप सेट पर निर्भर होना चाहिए. ऐसे किसान सौर ऊर्जा पंप लगाने के लिए पात्र माने जाएंगे. किसान के पास अपने नाम पर कम से कम 0.4 हेक्टेयर जमीन होना जरूरी है. हालांकि, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति किसानों के लिए 3 HP और 5 HP क्षमता के सोलर पंप लगाने पर न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी.

खेत में पानी जमा करने की व्यवस्था है तो भी मिलेगा लाभ

इस योजना में केवल वही किसान पात्र नहीं हैं जिनके पास पहले से कोई सिंचाई व्यवस्था है. अगर किसान ने अपने खेत में डिग्गी, फार्म पॉण्ड, जलहौज या अन्य जल संग्रहण ढांचा बनाया हुआ है और उसी जमा पानी से सिंचाई करता है, तो वह भी योजना के तहत सोलर पंप के लिए पात्र हो सकता है. इसका उद्देश्य किसानों को बारिश के पानी को जमा करने और उसका खेती में इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना भी है. किसान बारिश के दौरान पानी जमा कर सकते हैं और जरूरत के समय सोलर पंप की मदद से खेतों तक पहुंचा सकते हैं.

सोलर पंप के साथ पानी बचाने पर भी जोर

सरकार सिर्फ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं दे रही है, बल्कि सिंचाई में पानी बचाने पर भी जोर दिया जा रहा है. योजना के तहत सोलर पंप का इस्तेमाल करने वाले किसानों को ड्रिप, मिनी स्प्रिंकलर और स्प्रिंकलर जैसी पानी बचाने वाली तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसके अलावा ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, पॉली हाउस और लो-टनल जैसी संरचनाओं में भी पानी बचाने वाले संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. इससे कम पानी में फसल की बेहतर सिंचाई करने में मदद मिल सकती है.

किसानों की कम होगी लागत, पर्यावरण को भी फायदा

सोलर पंप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे चलाने के लिए बार-बार डीजल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे किसानों की सिंचाई लागत कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही डीजल के इस्तेमाल में कमी आने से प्रदूषण भी कम होगा. सरकार का उद्देश्य डीजल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ राजस्थान में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और कार्बन क्रेडिट हासिल करना भी है. यानी यह योजना किसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हो सकती है.

किसानों के लिए क्यों खास है PM-KUSUM योजना?

राजस्थान जैसे राज्य में जहां कई किसान सिंचाई के लिए डीजल पंप पर निर्भर हैं, वहां सोलर पंप खेती की लागत कम करने का एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है. सरकारी अनुदान के कारण किसानों पर शुरुआती खर्च का बोझ भी कम होता है. साथ ही बिजली कनेक्शन नहीं होने वाले किसान भी सौर ऊर्जा से अपने खेतों की सिंचाई कर सकते हैं. कुल मिलाकर, PM-KUSUM योजना के तहत सोलर पंप किसानों को डीजल के बढ़ते खर्च से राहत देने, पानी बचाने और खेती में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम है. योग्य किसान इस योजना के नियमों के अनुसार सोलर पंप पर मिलने वाले अनुदान का लाभ उठा सकते हैं.

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