बंगाल में आलू किसानों पर छाए संकट पर बीजेपी ने टीएमसी सरकार को घेरापश्चिम बंगाल में आलू किसानों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी की स्टेट यूनिट ने दावा किया कि फरवरी से अब तक राज्य में कम से कम पांच किसानों ने आत्महत्या की है. बीजेपी ने इसके लिए सीधे तौर पर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि आलू उत्पादकों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. BJP के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों से किसानों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है.
भट्टाचार्य ने कहा कि आलू की कीमतों में गिरावट और बिक्री को लेकर अनिश्चितता के कारण किसान आर्थिक दबाव में हैं. कई किसानों को यह डर सता रहा है कि वे अपनी फसल का उचित दाम नहीं पा सकेंगे और कर्ज चुकाने में असमर्थ रहेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा आलू को दूसरे राज्यों में भेजने पर रोक लगाने से संकट और गहरा गया है. इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ी, लेकिन मांग सीमित रहने के कारण कीमतों पर दबाव बना रहा. ऐसे हालात में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि सरकार किसानों को कोई ठोस आर्थिक राहत देने में विफल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए कोल्ड स्टोरेज संचालकों पर दबाव बना रही है कि वे किसानों से बाजार दर से अधिक कीमत पर आलू खरीदें. उन्होंने कहा कि यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और इससे सिस्टम पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
भट्टाचार्य ने कहा कि किसी भी सरकार का यह मूल दायित्व होता है कि वह किसानों के हितों की रक्षा करे, न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था सुनिश्चित करे और बाजार में उनकी उपज के उचित दाम की निगरानी करे. उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में पश्चिम बंगाल का कृषि क्षेत्र कई तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है.
उन्होंने एक और मुद्दा उठाते हुए कहा कि अवैध रेत खनन के कारण नदियों का रुख बदल रहा है और उपजाऊ जमीन जलमग्न हो रही है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है. यह स्थिति किसानों के लिए अतिरिक्त संकट पैदा कर रही है.
इसी दौरान, उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक माहौल को लेकर भी सवाल उठाए. राम नवमी के मौके पर उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर त्योहारों के आयोजन में बाधाएं पैदा की जा रही हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में सभी समुदायों को साथ मिलकर रहना चाहिए.
राजनीतिक मोर्चे पर उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और कई मामलों में सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं की संलिप्तता सामने आई है. उन्होंने चुनावी माहौल को देखते हुए निर्वाचन आयोग से राज्य में सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today