‘1235 रुपये रेट, प्‍याज किसानों के जख्‍मों पर नमक’, सरकार पर भड़का किसान संगठन; आंदोलन की दी चेतावनी

‘1235 रुपये रेट, प्‍याज किसानों के जख्‍मों पर नमक’, सरकार पर भड़का किसान संगठन; आंदोलन की दी चेतावनी

महाराष्ट्र में ₹1235 प्रति क्विंटल प्याज खरीद रेट को लेकर किसान संगठन भड़क गया है. भारत दिघोले ने इसे किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है. संगठन ने सरकार से कम से कम ₹3000 प्रति क्विंटल रेट और कम दाम पर फसल बेच चुके किसानों को मुआवजा देने की मांग की है.

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‘1235 रुपये रेट, प्‍याज किसानों के जख्‍मों पर नमक’, सरकार पर भड़का किसान संगठन; आंदोलन की दी चेतावनीप्‍याज खरीदी रेट पर बवाल (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में प्याज खरीद को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर नया विवाद खड़ा हो गया है. बीते दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सातारा में घोषणा की कि किसानों से प्याज की खरीद ₹1235 प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी. सरकार के इतने कम रेट पर खरीद के ऐलान महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने कड़ा विरोध जताया है. संगठन ने कहा कि यह रेट किसानों को राहत देने के बजाय उनके साथ अन्याय करने जैसा है.

भारत दिघोले ने सरकार पर बोला हमला

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि प्याज उत्पादकों की हालत पहले से ही खराब है और ऐसे समय में इतना कम रेट तय करना किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है. उन्‍होंने कहा कि बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई, परिवहन और भंडारण का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सरकार किसानों को उनकी लागत तक नहीं दिला पा रही है.

2023 के मुकाबले आधे से भी कम रेट पर सवाल

संघ ने सरकार को 2023 की खरीद नीति की याद भी दिलाई. भारत दिघोले ने कहा कि अगस्त 2023 में प्याज की कीमतों में गिरावट के दौरान तत्कालीन उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्र सरकार की ओर से ₹2410 प्रति क्विंटल की दर से खरीद का ऐलान किया था. अब जब वही नेता मुख्यमंत्री हैं, तब बढ़ती महंगाई और लागत के बावजूद किसानों को उससे आधे से भी कम रेट दिया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2023 में ₹2410 प्रति क्विंटल संभव था तो 2026 में कम से कम ₹3000 प्रति क्विंटल का रेट क्यों नहीं दिया जा सकता.

उत्पादन लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान

प्याज किसानों का कहना है कि मौजूदा रेट में उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही है.  बीज, पौध तैयार करने, कीटनाशक, रासायनिक खाद, मजदूरी और स्टोरेज पर भारी खर्च करना पड़ता है. कई किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन बाजार में कीमत गिरने के बाद उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ती है. कई बार तो उपज सड़क पर फेंकने तक की नौबत आ जाती है.

कम रेट पर बेचने वालों के लिए मुआवजे की मांग

संघ ने मांग की है कि पिछले कुछ महीनों में जिन किसानों ने बेहद कम कीमतों पर प्याज बेचा है, उन्हें सरकार तुरंत मुआवजा दे. संगठन का कहना है कि घोषित सरकारी रेट और किसानों को मिली वास्तविक कीमत के बीच का अंतर सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कराया जाए ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके.

NAFED और NCCF खरीद केंद्र शुरू करने की मांग

किसान संगठन ने सरकार से NAFED और NCCF के खरीद केंद्र तुरंत शुरू करने की मांग भी की है. संगठन का कहना है कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त होनी चाहिए. साथ ही खरीद सीधे कृषि उपज मंडी समितियों यानी APMC के जरिए किसानों से की जाए, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके. संघ ने यह भी कहा कि खरीद पर किसी तरह की बेवजह शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए.

सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

भारत दिघोले ने चेतावनी दी कि अगर प्याज उत्पादक किसानों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो महाराष्ट्र में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्याज उत्पादक किसान देश की खाद्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें उनकी लागत से भी कम दाम देना घोर अन्याय है. उन्होंने सरकार से तुरंत फैसला बदलने और किसानों को न्याय देने की मांग की है.

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