केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शनिवार को विदिशा के दौरे पर पहुंचे. उन्होंने सबसे पहले बाड़ वाले गणेश मंदिर में दर्शन-पूजन किया और वात्सल्य स्कूल में गणेश जी की आरती में शामिल होकर छात्र-छात्राओं से संवाद किया. इसके बाद खेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं और बच्चों के साथ लगभग दो किलोमीटर साइकिल चलाई. मंत्री ने किसानों के हित को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि भारत ने इस साल 3.7 प्रतिशत कृषि की ग्रोथ हासिल की है, जो अब तक इतिहास में नहीं हुई.
उन्होंने कहा कि इस वृद्धि से अन्न के भंडार भर चुके हैं और गेहूं, चावल, मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. पहले समय में भारत अमेरिका से खराब गेहूं पीएल-480 पर निर्भर था, लेकिन अब अन्न भंडार सुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ देशों का दबाव था कि भारत कृषि का पूरा बाजार उनके लिए खोल दे, लेकिन देश गर्व से कह रहा है कि हमारे किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा.
कृषि मंत्री ने किसानों की दवाओं और इनपुट्स की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया. उन्होंने बताया कि पहले डीएपी, यूरिया और अन्य खाद लेते समय डीलर किसानों को अनावश्यक और बेकार कीटनाशक थमा देते थे. बायोस्टिमुलेन्ट के नाम पर लगभग 30 हजार दवाइयां बाजार में उपलब्ध थीं, जिनमें से अधिकांश का कोई वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हुआ था. अब केवल वही दवाइयां बिकेंगी, जिनका परीक्षण आईसीएआर और कृषि विश्वविद्यालयों में प्रभावी साबित हुआ हो. नकली या बेअसर दवाइयों से यदि फसल बर्बाद हुई तो कंपनियों का लाइसेंस रद्द होगा और किसानों को मुआवजा मिलेगा.
कृषि मंत्री ने प्राकृतिक खेती और लागत घटाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि खेती को फायदे का व्यवसाय बनाने के लिए उत्पादन बढ़ाना और लागत घटाना दोनों जरूरी हैं. किसानों के लिए छह सूत्रीय रणनीति बनाई गई है, जिसमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उचित मूल्य देना, नुकसान की भरपाई करना, कृषि का विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना शामिल है. उन्होंने प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा किए और बताया कि वैज्ञानिक तरीके अपनाकर खाद और संसाधनों की लागत कम की जा सकती है.
कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों और किसानों को जोड़ने के लिए भी अभियान की जानकारी दी. देश में लगभग 16 हजार प्रयोगशालाओं में रिसर्च हो रही थी, लेकिन उसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा था. इसको देखते हुए 2170 टीमें बनाई गईं, जो वैज्ञानिकों को सीधे किसानों के खेतों में भेजेंगी. आगामी रबी फसल के लिए 3 अक्टूबर से वैज्ञानिक किसानों के खेतों में पहुंचेंगे और नई तकनीक, उन्नत खेती के उपाय और उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने के व्यावहारिक तरीके बताएंगे.
केंद्रीय मंत्री ने माता-पिता के महत्व की कहानी सुनाई और बच्चों को शिक्षा दी कि माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. गणेश जी की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि किसी भी सफलता से पहले माता-पिता का सम्मान और सेवा करना आवश्यक है. साथ ही उन्होंने स्वदेशी अपनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की हर चीज़ जैसे खाने-पीने की वस्तुएं, तेल, साबुन और कपड़े केवल देश में बनी चीज़ें खरीदें. विदेशी वस्तुओं पर खर्च किए गए पैसे बाहर चले जाते हैं, जबकि देशी सामान खरीदने से रोजगार और व्यापार में बढ़ोतरी होती है.
विदिशा दौरे के दौरान मंत्री ने उन्नत कृषि तकनीक संगोष्ठी में भी भाग लिया. किसानों से संवाद में उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाना भी जरूरी है, ताकि खेती वास्तव में लाभकारी व्यवसाय बन सके. उन्होंने कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और वैज्ञानिक विधियों को अपनाने का आह्वान किया.
दौरे के अंत में मंत्री ने खेल दिवस में भाग लेते हुए युवाओं और बच्चों के साथ साइकिल चलाई और उन्हें स्वास्थ्य व खेल-कूद में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी. इस दौरान किसानों और बच्चों को आधुनिक कृषि, प्राकृतिक खेती और उत्पादन बढ़ाने के उपायों के बारे में जानकारी दी गई.
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