पंजाब में किसानों का विरोध प्रदर्शनशुक्रवार को पंजाब के मालवा बेल्ट में तनाव बढ़ गया, जब भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) के सदस्यों की बरनाला जिले के टापा में पुलिस से झड़प हो गई. यह हिंसा तब हुई जब किसानों ने पुलिस के कई लेयर वाले बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की. प्रदर्शनकारी बठिंडा में डिप्टी कमिश्नर के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करने जा रहे थे, और बठिंडा जेल से दो किसान नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग कर रहे थे.
हालात तब हिंसक हो गए जब पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद टकराव हुआ और मौके पर ही प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया. बरनाला में हिरासत में लिए गए लोगों की सही संख्या अभी कन्फर्म नहीं हुई है, लेकिन यह कार्रवाई पड़ोसी संगरूर तक फैल गई, जहां अधिकारियों ने लगभग 250 किसानों को एहतियातन हिरासत में लिया.
किसान यूनियन और प्रशासन के बीच यह टकराव प्रमुख कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद हुआ है. BKU (एकता-उगराहां) पंजाब राज्य के सबसे प्रभावशाली किसान संगठनों में से एक है. इस संगठन ने बठिंडा में अपनी ताकत दिखाने का आह्वान किया था ताकि सरकार पर अपने नेताओं के खिलाफ आरोप हटाने का दबाव बनाया जा सके.
जिले की सीमाओं पर भारी पुलिस की तैनाती की गई ताकि किसानों को किसी भी हिंसक या उग्र आंदोलन से रोका जा सके. किसान यूनियनों की किसी भी और गतिविधि को रोकने के लिए टापा और बरनाला-बठिंडा हाईवे पर भारी सुरक्षा तैनात की गई थी.
स्थानीय नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए एहतियातन हिरासत को उनकी आवाज दबाने का "अलोकतांत्रिक" प्रयास बताया, जबकि जिला प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम जरूरी थे.
बड़ी संख्या में मौजूद यूनियन नेताओं ने प्रशासन पर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए मनमानी करने का आरोप लगाया. BKU एकता उगराहां के राज्य अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने 6 फरवरी को एक सभा का आह्वान किया था, जिसमें बरनाला में डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय का घेराव करने की योजना भी शामिल थी.
यूनियन अपने सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही को तुरंत वापस लेने की मांग पर अड़ी हुई है, और पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक धमकी का एक रूप बता रही है. जैसे-जैसे टकराव बढ़ा, नेशनल हाईवे पर कई घंटों तक भारी ट्रैफिक जाम रहा. पुलिस ने कहा कि बैरिकेडिंग कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक जरूरी कदम था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरियर को पार कर लिया, जिससे सुरक्षाकर्मियों को पीछे हटना पड़ा.
शुक्रवार शाम तक, इलाके में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, किसान यूनियन ने पंजाब सरकार की ओर से उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन तेज करने की कसम खाई है.
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