महाराष्ट्र में प्याज किसानों की हालत पस्तमहाराष्ट्र में प्याज की क्या हालत है, उसे सोलापुर के एक किसान की घटना से समझ सकते हैं. इस किसान ने सिविल इंजीनियरिंग का करियर छोड़कर खेती शुरू की थी, लेकिन उसे अपनी खड़ी प्याज की फसल को जलाने पर मजबूर होना पड़ा. वजह है कि उस किसान को कोल्हापुर APMC में 1 किलो प्याज के सिर्फ 67 पैसे मिले. इतनी कम रकम कि उससे उसकी मेहनत का खर्च भी नहीं निकला.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट बताती है, मोहोल तहसील के बेगमपुर गांव के रहने वाले लखन माने ने, सोलापुर बाजार में मिल रहे 50 पैसे प्रति किलो के दाम से बेहतर दाम पाने की उम्मीद में लगभग 200 किलोमीटर का सफर तय किया था. लेकिन, उन्हें निराशा ही हाथ लगी और उन्होंने अपनी बची-खुची उपज को आग के हवाले कर दिया.
माने ने कहा, "यह उम्मीद करते हुए कि कम से कम कोल्हापुर APMC में प्याज का ठीक-ठाक दाम मिल जाएगा, मैंने अपनी फसल को सोलापुर APMC ले जाने का फैसला नहीं किया, जो मेरे घर से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर है. सोलापुर APMC में किसानों को 50 पैसे जितना कम दाम मिल रहा है. लेकिन, मुझे निराशा ही हाथ लगी और सोलापुर से लौटने के बाद मैंने खेतों में ही प्याज जला दी." माने ने 2016 में सिविल इंजीनियरिंग पूरी की थी, लेकिन अपने माता-पिता की मदद करने के लिए खेती को चुना था.
माने ने दो एकड़ खेत में प्याज उगाई थी. 8 मई को, वह 100 बोरे - जिनमें से हर एक का वजन लगभग 55 किलो था - कोल्हापुर APMC ले गया, लेकिन उसे एक व्यापारी से कुल मिलाकर सिर्फ 3,700 रुपये ही मिले.
माने की कहानी कोई अकेली घटना नहीं है. कुछ ही दिन पहले, बार्शी के एक और किसान ने कोल्हापुर तक 270 किलोमीटर का सफर तय किया था और उसे अपनी फसल के लिए सिर्फ 1 रुपया प्रति किलो का दाम मिला था.
"हम जानते हैं कि बार्शी के किसान ने कम क्वालिटी के प्याज खरीदे थे. बारिश में उसकी फसल खराब हो गई होगी, जैसा कि बोरियों से टपकते पानी से साफ पता चल रहा था. प्याज पर कोई छिलका भी नहीं बचा था. व्यापारी उस स्टॉक को खरीदने को तैयार नहीं था, लेकिन किसान जोर देता रहा और कम से कम 2 रुपये प्रति किलो की कीमत मांगता रहा. अगर व्यापारी मना कर देता, तो किसान पर और बोझ पड़ जाता, क्योंकि उसे उपज को किसी दूसरे बाजार तक ले जाने के लिए दोबारा ट्रांसपोर्ट का खर्च उठाना पड़ता. उसके पास लगभग 40 बोरियां थीं, जिनमें से हर एक में 50 किलो प्याज था. व्यापारियों का यह आम नियम है कि ऐसी क्वालिटी की उपज के लिए 1 रुपये प्रति किलो की दर से बिल बनाया जाता है, जो आखिरकार कूड़ेदान में ही जाती है," कोल्हापुर APMC में प्याज विभाग के प्रमुख मनोज सालुंखे ने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से कहा.
सालुंखे ने कहा कि अभी तो सबसे अच्छी क्वालिटी के प्याज भी सिर्फ 12-13 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, जो कि गुजारा करने लायक कीमत से काफी कम है. "APMC में प्याज की सप्लाई बढ़ गई है, क्योंकि युद्ध और दूसरे कारणों से एक्सपोर्ट पर पाबंदियां लगी हुई हैं. साल के इस समय में, आमतौर पर केरल और दक्षिणी राज्यों से मांग आती है, लेकिन वहां के व्यापारी अभी ऑर्डर देने को तैयार नहीं हैं," उन्होंने कहा.
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