जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किया आंदोलन का ऐलानकिसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसानों के मुद्दों को लेकर दोबारा सड़क पर उतरने का ऐलान किया है. वो एमएसपी की लीगल गारंटी, कर्जमुक्ति, डब्यूटीओ से खेती को बाहर निकालने और सीड बिल के प्रावधानों के खिलाफ फरवरी में देशव्यापी यात्रा पर निकलेंगे. उन्होंने केंद्र सरकार और कृषि मंत्री पर किसानों से बातचीत से भागने का आरोप लगाते हुए दोबारा आंदोलन का रोडमैप तैयार किया है.
इससे पहले डल्लेवाल 132 दिनों तक भूख हड़ताल कर चुके हैं. शंभू और खनौरी बॉर्डर पर उन्हीं की अगुवाई में संयुक्त किसान मोर्चा-गैर राजनीतिक ने 400 दिन तक आंदोलन चलाया था. आंदोलन को कुचले जाने से पहले केंद्र सरकार आंदोलन करने वाले किसानों से 7 दौर की बातचीत कर चुकी थी, लेकिन उसके बाद चिट्ठी देने के बावजूद अब तक आठवें दौर की बातचीत नहीं की, लिहाजा अब किसान दोबारा सड़क पर उतरने की तैयारी में जुट गए हैं.
कई किसान नेताओं की मौजूदगी में गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डल्लेवाल ने कहा कि सीड बिल में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिससे कि भारत के किसान दूसरे देशों के बीजों के गुलाम बन जाएंगे. वहां से जीएम फसलों के सीड यहां आ जाएंगे. इससे हमारे किसानों के घरेलू बीज और यहां का बीज बाजार चौपट हो जाएगा.
डल्लेवाल ने कृषि उत्पादन के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि कृषि मंत्री रिकॉर्ड अनाज उत्पादन का दावा कर रहे हैं और इसे किसानों की खुशहाली से जोड़ा जा रहा है. जबकि ज्यादा उत्पादन किसानों की खुशहाली का कोई पैमाना नहीं है. किसान अधिक उपज पैदा कर रहा है, लेकिन उसे बिक्री का सही दाम नहीं मिल रहा, ऐसे में रिकॉर्ड उत्पादन का क्या लाभ.
डल्लेवाल ने सीड बिल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी के बारे में कहा, पूरे देश में एसकेएम नॉन पॉलिटिकल किसानों के लिए यात्रा निकालेगा. एमएसपी गारंटी कानून को लेकर पंचायतों से प्रस्ताव पास करवाए जाएंगे. एक बार फिर किसान आंदोलन का रोडमैप तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, यात्रा फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू होगी और मार्च तक चलेगी. 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली के तौर पर खत्म होगी.
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, हमारा सबसे बड़ा एजेंडा है कि भारत किसी भी तरह से डब्ल्यूटीओ से बाहर आए. जब तक ऐसा नहीं होगा तब तक भारत के किसानों का भला नहीं होगा. सरकार ने अगस्त 2025 में लिखित वादा किया था कि 10 दिन में वो किसानों के साथ बैठक करेगी, लेकिन अब तक नहीं किया. डल्लेवाल ने केंद्र सरकार को किसानों के साथ बातचीत से भागने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल के लिए मजबूर किया.
डल्लेवाल ने बताया कि किसानों की यात्रा फरवरी के पहले सप्ताह में कन्याकुमारी से शुरू होगी और 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में खत्म होगी. 1 लाख से ज्यादा गांवों से अपनी मांगों के समर्थन में प्रस्ताव लिए जाएंगे, जिसे 19 मार्च को प्रधानमंत्री को सौपा जाएगा.
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ भी मौजूद थे. उन्होंने आंदोलन की रणनीति के बारे में बताया कि किसानों का मार्च कश्मीर से कन्याकुमारी तक चलेगा और दिल्ली के रामलीला मैदान में खत्म होगा. इस आंदोलन में कई किसान नेता शामिल होंगे और सीड बिल के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे.
इससे पहले डल्लेवाल पंजाब के खनौरी बॉर्डर पर 132 दिन की भूख हड़ताल कर चुके हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों की उपज की लीगल एमएसपी गारंटी का कानून बनाने की मांग की थी. उस दौरान सरकार के साथ उनकी कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही. बाद में डल्लेवाल के धरना स्थल पर पंजाब पुलिस ने कार्रवाई कर दी जिसके बाद डल्लेवाल को अपना अनशन खत्म करना पड़ा.
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