भोपाल में प्रस्तावित किसान महापंचायत से पहले राजनीति गरमाईभोपाल में प्रस्तावित किसान महापंचायत से पहले राजनीति तेज हो गई है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर किसानों को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को गलत जानकारी देकर डराने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को देश और आस्था के मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए और महाकाल मंदिर जाकर क्षमा याचना करनी चाहिए.
कांग्रेस इस किसान महापंचायत को अपने राष्ट्रीय किसान अभियान की शुरुआत बता रही है. वहीं भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है और कह रही है कि उसने किसानों के लिए ऐतिहासिक काम किए हैं. दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है.
अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड डील को लेकर भी बहस हो रही है. कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के समझौते से किसानों के हितों की अनदेखी हो सकती है. लेकिन मुख्यमंत्री का दावा है कि केंद्र और राज्य सरकार ने हमेशा किसानों के फायदे को ध्यान में रखा है. उन्होंने यूरोपीय यूनियन के साथ हुए समझौते को भी किसानों के हित में बताया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कई कॉटन मिलें बंद हो गई थीं, लेकिन अब सरकार कृषि और उद्योग दोनों को मजबूत बना रही है. उनका कहना है कि खेती और उद्योग साथ-साथ आगे बढ़ेंगे तो किसानों की आय बढ़ेगी.
मुख्यमंत्री ने बताया कि सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना के तहत 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी गई है. इस योजना की देशभर में सराहना हुई है और कई राज्यों ने इसे अपनाया है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य “समृद्ध किसान, समृद्ध मध्य प्रदेश” बनाना है.
सरकार चाहती है कि राज्य को दुनिया में एक एग्रो एक्सपर्ट के रूप में पहचाना जाए. इसके लिए सिंचाई की सुविधा बढ़ाई जा रही है, ताकि खेतों में समय पर पानी पहुंचे और फसल अच्छी हो.
बिजली और पानी की बेहतर सुविधा से सरसों की खेती में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. अभी बाजार में सरसों का भाव 5500 से 6000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि केंद्र सरकार ने 6200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय किया है. सरकार कोशिश कर रही है कि किसानों को सही दाम मिले. इसके लिए सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने की तैयारी हो रही है.
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसान मूंग की जगह उड़द की खेती करेंगे तो सरकार 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देगी. इससे किसानों को ज्यादा फायदा होगा. राज्य में दलहन की खेती तेजी से बढ़ रही है. मसूर, चना और उड़द की खरीदी के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं.
पीला मोजेक जैसी बीमारियों से फसल खराब होने पर सरकार मुआवजा देने की कोशिश कर रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी किसान मुश्किल में होंगे, सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी.
एआई समिट के दौरान कांग्रेस के प्रदर्शन पर भी मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से राज्य और देश की छवि खराब होती है.
कुल मिलाकर, भोपाल में किसान महापंचायत से पहले राजनीतिक माहौल गरम है. एक तरफ कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी तरफ सरकार अपनी उपलब्धियां बता रही है. लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि किसानों की आय बढ़े और उन्हें सही दाम मिले. सरकार का कहना है कि किसानों का विकास ही राज्य का विकास है. (भोपाल से रविश का इनपुट)
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