धान खरीदी को लेकर सदन में हंगामा (सांकेतिक तस्वीर)ओडिशा में धान खरीदी को लेकर विधानसभा में मंगलवार को तीखी बहस देखने को मिली. सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री के सी पात्रा ने कहा कि राज्य सरकार 31 मार्च तक सभी पंजीकृत (रजिस्ट्रेशन करने वाले) किसानों से धान की खरीद पूरी करेगी. उन्होंने विपक्ष के सरकार पर किसानों की उपेक्षा और खरीद व्यवस्था में अव्यवस्था के आरोपों को खारिज किया.
धान खरीदी पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनीपति ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि धान खरीद की मौजूदा व्यवस्था में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं. मंडियों में धान लेकर पहुंचे किसानों को दिनों-दिन इंतजार करना पड़ रहा है और कई किसान खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं. उन्होंने मिलर्स और अधिकारियों के बीच कथित गठजोड़ का भी आरोप लगाया और कहा कि इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है.
कांग्रेस विधायक ने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के बावजूद राज्य के किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा है. बहिनीपति ने कहा कि किसानों को प्रति क्विंटल तय दर से कम भुगतान किया जा रहा है, जबकि कई इलाकों में मजबूरी में बेहद कम दाम पर धान बेचने की स्थिति बन रही है.
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए मंत्री के सी पात्र ने कहा कि धान खरीदी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. उन्होंने विधानसभा को भरोसा दिलाया कि सरकार खरीफ मार्केटिंग सीजन के अंत यानी 31 मार्च तक सभी पंजीकृत किसानों से धान की खरीद सुनिश्चित करेगी. मंत्री ने कहा कि सरकार की नीयत और कोशिश दोनों साफ हैं और किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
उन्होंने सदन में बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार ने 19.73 लाख किसानों से 92.64 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है और इसके बदले 28,619 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. मौजूदा सत्र में भी करीब 19.68 लाख किसान पंजीकृत हैं और अब तक 64 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान की खरीद हो चुकी है. मंत्री ने बताया कि यह आंकड़े सरकार की सक्रियता और प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.
वहीं, कांग्रेस विधायक अशोक दास ने धान खरीदी के टोकन सिस्टम पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई किसानों को उनकी पूरी उपज के हिसाब से टोकन नहीं दिए जा रहे. अगर किसी किसान ने पांच एकड़ में धान उगाया है तो उसे केवल दो एकड़ की उपज बेचने का टोकन मिल रहा है. ऐसे में बची हुई उपज का क्या होगा, यह बड़ा सवाल है.
विपक्ष के लगातार उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा विधायकों ने उनपर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया. सत्तापक्ष के विधायक ने कहा था कि नई सरकार ने किसानों के हित में ठोस कदम उठाए हैं. भाजपा विधायकों ने दावा किया कि सरकार द्वारा प्रति क्विंटल इनपुट सहायता देने से किसानों को सीधा लाभ मिला है और विपक्ष इसी कारण किसानों का भरोसा खोने से डर रहा है.
धान खरीदी पर बहस के दौरान सदन का माहौल कई बार गर्म हो गया. शोरगुल और नारेबाजी के बीच बीजद विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया. उन्होंने कहा कि इतना संवेदनशील मुद्दा शांतिपूर्ण माहौल में उठाया जाना चाहिए था. इससे पहले और बाद के सत्रों में भी कांग्रेस और बीजद के विधायकों ने सदन के भीतर और बाहर प्रदर्शन किया. कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास धरना देकर किसानों को न्याय दिलाने की मांग की. (पीटीआई)
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