पंजाब में मान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे किसान (फोटो-ITG)चंडीगढ़ में किसानों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी आगे की रणनीति बताई. इस कॉन्फ्रेंस में किसान आंदोलन के बारे में जानकारी दी गई. यह कॉन्फ्रेंस पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ था जिसमें सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की तैयारी के बारे में बताया गया. इसमें किसान मजदूर मोर्चा के सदस्यों ने हिस्सा लिया. मोर्चा के सदस्यों ने बताया कि पंजाब सरकार ने उनसे जो वादे किए थे, उस पर अमल नहीं किया गया और पंजाब सरकार ने किसानों को धोखा दिया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता मनजीत राय ने कहा, पंजाब सरकार ने हमारे साथ धोखा किया है. उसने हमें मीटिंग की रेगुलर तारीखें दीं और कल एक मीटिंग तय थी. लेकिन सरकार मीटिंग करना भूल गई और पंजाब भवन भी बुक नहीं किया गया था. हम गए और वहां कोई अधिकारी नहीं था, जबकि मीटिंग तय थी.
मनजीत राय ने कहा, हमने तय किया है कि उनके (AAP) MLA और दूसरे लोग जहां भी जाएंगे, हम उस लेटर के साथ उनसे सवाल करेंगे. 18 जनवरी को CM अमृतसर जा रहे हैं. हम वहां भी उनसे इस बारे में सवाल करेंगे. हम सभी MLA और मंत्रियों से सवाल करेंगे कि किसानों के साथ मीटिंग करने के लिए कोई अधिकारी या सरकारी प्रतिनिधि क्यों नहीं आया.
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन पंधेर भी मौजूद थे. पंधेर ने कहा, शंभू और खनौरी बॉर्डर पर हुए नुकसान के मुआवजे के मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है. पंजाब सरकार ने हमें वह लेटर भी नहीं दिया है, जिसके बारे में वह दावा करती है कि उसने बिजली संशोधन बिल के बारे में केंद्र सरकार को लिखा है. हमारी कई दूसरी मांगें भी पेंडिंग हैं.
पंधेर ने कहा, हम 18 जनवरी को अमृतसर में CM की रैली के दौरान विरोध प्रदर्शन करेंगे. लोहड़ी के दिन, हम केंद्र सरकार द्वारा किसानों के खिलाफ बनाए गए कानूनों और फैसलों की कॉपी जलाएंगे. 5 फरवरी को — हम पंजाब के MLA और मंत्रियों का घेराव करेंगे. उनके घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
किसान नेता हरजिंदर सिंह ने कहा, पंजाब नशे की समस्या का सामना कर रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी गंभीर है. पंजाब सरकार को अपने तरीके सुधारने चाहिए और स्थिति को कंट्रोल करना चाहिए.
दूसरी ओर फिरोजपुर जिले में कई किसान बाढ़ से हुए नुकसान का मुआवजा नहीं मिलने पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. इन किसानों की मांग है कि सरकार जल्द बाढ़ से हुए फसल नुकसान का मुआवजा दे ताकि वे अगली खेती के काम में लग सकें. किसानों का कहना है कि बाढ़ से उनके खेतों और रोजी-रोटी को बर्बाद हुए तीन महीने बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से राहत जारी करने में "नाकामी" के खिलाफ वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
"हरि पीड़ित किसान संघर्ष समिति" के बैनर तले फिरोजपुर, तरनतारन, कपूरथला और मोगा जिलों के किसान 1 जनवरी से फिरोजपुर जिले के हरिके हेडवर्क्स पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
किसानों का आरोप है कि प्रति एकड़ 20,000 रुपये मुआवजे का आश्वासन देने के बावजूद, सरकार अपना वादा पूरा करने में नाकाम रही है, जिससे उन्हें अपना आंदोलन तेज करने पर मजबूर होना पड़ा है.
समिति के प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह अहलूवालिया ने मंगलवार को कहा कि बाढ़ से होने वाला नुकसान दशकों से एक लगातार समस्या रही है, लेकिन लगातार सरकारें इसका स्थायी समाधान देने में नाकाम रही हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today