किसान संगठनों ने इंडिया-US ट्रेड डील साइन न करने की मांग उठाई (Photo: ITG)नई दिल्ली में किसान संगठनों के संयुक्त मंच संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. मोर्चे ने आरोप लगाया है कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे देश की कृषि और डेयरी अर्थव्यवस्था पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का दबदबा बढ़ेगा. इसी आशंका के चलते एसकेएम ने इस करार को पूरी तरह रद्द करने की मांग की है. ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी बयान में एसकेएम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की अपील की.
संगठन ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि वह पीएम नरेंद्र मोदी को इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने के लिए कहें. किसान संगठनों का कहना है कि अगर यह डील लागू होती है तो देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और राज्यों के अधिकारों पर गंभीर असर पड़ेगा. एसकेएम ने ऐलान किया है कि बजट सत्र के दोबारा शुरू होने से पहले देशभर में जनसभाएं आयोजित की जाएंगी.
इन बैठकों में किसानों के बीच इस व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों पर चर्चा होगी और राष्ट्रपति के नाम एक खुला पत्र पारित कर भेजा जाएगा. संगठन ने वाणिज्य मंत्री पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कृषि और डेयरी क्षेत्रों को विदेशी कंपनियों के लिए खोलकर आत्मनिर्भरता और संप्रभुता से समझौता किया जा रहा है.
संगठन ने वित्त मंत्रालय की एक हालिया चिट्ठी पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें केरल सरकार से गेहूं और धान पर दिए जा रहे बोनस की समीक्षा कर उसे बंद करने पर विचार करने को कहा गया था. एसकेएम ने मांग की कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस पत्र को तुरंत वापस लें. किसान नेताओं ने कहा कि यह कदम राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर हमला है और किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाने के अधिकार को कमजोर करता है.
एसकेएम ने यह भी घोषणा की कि 27 फरवरी को या उसके बाद किसी उपयुक्त तारीख पर संगठन के राज्य समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात करेंगे. इन बैठकों में न केवल भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध दर्ज कराया जाएगा, बल्कि राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा और किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग भी रखी जाएगी. संयुक्त किसान मोर्चा ने संकेत दिया है कि अगर सरकार ने किसानों की आशंकाओं को नजरअंदाज किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज होगा.
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