कुमारी शैलजाकांग्रेस पार्टी ने हरियाणा सरकार पर किसानों के मुद्दे को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया है. दरअसल, कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने रविवार को दावा किया कि BJP सरकार की बेकार पॉलिसी की वजह से हरियाणा के किसान कर्ज में डूब रहे हैं. उन्होंने कहा कि खेती लंबे समय से हरियाणा की खुशहाली की रीढ़ रही है, लेकिन BJP सरकार की पॉलिसी की वजह से राज्य के किसान तेज़ी से कर्ज़ के जाल में फंसते जा रहे हैं. सिरसा से कांग्रेस सांसद ने कहा कि ऑफिशियल डेटा कन्फर्म करते हैं कि हरियाणा में हर किसान परिवार पर एवरेज कर्ज़ 1.83 लाख रुपये से ज़्यादा हो गया है.
कुमारी शैलजा ने कहा कि पिछले साल हरियाणा असेंबली में सरकार की तरफ से दिए गए एक लिखित जवाब में, 30 सितंबर, 2025 तक, राज्य के 25,67,467 किसानों पर बकाया खेती का कर्ज़ 60,816 करोड़ रुपये है. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP की डबल इंजन सरकार में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा फायदा नहीं मिल रहा है, कुदरती आफतों के दौरान सही मुआवजा नहीं दिया जा रहा है, और जमीन हीन किसान बहुत ज़्यादा कमज़ोर बने हुए हैं. उन्होंने एक बयान में कहा कि इन हालात ने खेती को फ़ायदेमंद काम से परेशानी का ज़रिया बना दिया है.
शैलजा ने कहा कि किसान और युवा हरियाणा की असली ताकत हैं, लेकिन मौजूदा सरकार की नीतियों ने किसानों को और ज़्यादा कर्ज़ में धकेल दिया है, जबकि युवाओं को बेरोजगारी, नशे की लत और माइग्रेशन की ओर धकेल दिया है. कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार से एक ठोस खेती कर्ज राहत प्लान बनाने, सभी फ़सलों के लिए असरदार MSP पक्का करने, कुदरती आफतों के मामलों में समय पर मुआवजा देने और छोटे और जमीन हीन किसानों के लिए एक खास पैकेज की घोषणा करने की मांग की.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कांग्रेस किसानों के हक और हितों के लिए लड़ती रहेगी. शैलजा ने सिरसा लोकसभा सीट के नाथूसरी चोपता ब्लॉक के तहत कई ग्राम पंचायतों में 'जोहड़' (तालाब) की जमीन के बारे में भी हरियाणा के मुख्यमंत्री को लिखा है. शैलजा ने कहा कि लोकल लोगों ने उन्हें बताया कि कई गांवों में तालाब की जमीन की अभी की असल स्थिति रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज स्थिति से अलग है.
लेटर में कहा गया है कि पिछले रिकॉर्ड अब जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते, जिससे गांव वालों को प्रैक्टिकल मुश्किलें हो रही हैं और ज़मीन के इस्तेमाल, सिंचाई, जानवरों के मैनेजमेंट और ग्रामीण विकास की योजनाओं पर बुरा असर पड़ रहा है. उन्होंने रिक्वेस्ट की कि संबंधित डिपार्टमेंट को इन पंचायतों में जोहड़ की जमीन का नए सिरे से फिजिकल वेरिफिकेशन और सर्वे करने का निर्देश दिया जाए, और रेवेन्यू रिकॉर्ड में जरूरी सुधार किए जाएं. उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में होने वाले झगड़ों को रोका जा सकेगा और पानी बचाने के सिस्टम को बैलेंस्ड बनाए रखने में मदद मिलेगी.
जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार मानती है कि अधिकांश किसान खेती करने के लिए साहूकार ले उधार लेते हैं. लेकिन कर्ज चुकाते-चुकाते किसान की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है. ऐसे में किसानों को घर का खर्च चलाने के लिए जमीन तक बेचनी पड़ती है. ऐसे में साहुकारों के चंगुल से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की है. इस योजना के तहत भी किसानों को लोन चुकाना होता है. जो किसानों पर कर्ज के तौर पर ही देखा जाता है. कुल मिलाकर इस योजना से देश के कई राज्यों के किसानों को फायदा हुआ है. (PTI)
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