ट्रेड डील पर AAP का अटैककिसानों के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) काफी सक्रिय नजर आ रही है. दरअसल, AAP ने गुजरात के राज्यपाल पर बड़ा आरोप लगा दिया. आम आदमी पार्टी ने कहा है कि हमने बार बार राज्यपाल से मिलने का समय मांगा पर राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद हमें समय नहीं दिया जा रहा है. आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसूदान गढ़वी ने कहा कि आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी है और पांच विधायकों के साथ लगातार किसानों के मुद्दों को उठा रही है, फिर भी राज्यपाल से मिलने का समय नहीं दिया जा रहा है.
इससे पहले, राजकोट गेम जोन मामले में पहला पत्र दिया गया था. इसके बाद अलग-अलग जन मुद्दों पर राज्य सरकार को पत्र दिए गए और चैतर वासावा द्वारा भी एक अलग पत्र लिखा गया. हालांकि, मुलाकात का समय नहीं दिया गया. राज्यपाल आज भले ही उपलब्ध न हों, लेकिन पार्टी ने याचिका को आधिकारिक रूप से सौंपने का फैसला किया है.
इसूदान गढ़वी ने कहा कि गुजरात की जनता के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. किसानों, वंचितों, गरीबों, शोषितों, छोटे उद्योगपतियों और पशुपालकों के हितों के लिए लड़ाई जारी रहेगी. इसुदान गढ़वी ने आगे कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्योगपतियों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. क्या यह व्यापार समझौता एपस्टीन कांड या अडानी कांड के दबाव में किया गया है? उनके अनुसार, पहले अमेरिकी उत्पादों पर लगभग 30 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसे घटाकर शून्य किया जा सकता है, जबकि भारतीय उत्पादों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है.
गढ़वी ने कहा कि वर्तमान में किसानों को अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, फसल बीमा ठीक से लागू नहीं हो रहा है और सिंचाई और बिजली की लागत बढ़ गई है. ऐसे में अगर रियायती विदेशी कृषि उत्पाद बाजार में आते हैं, तो स्थानीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में किसानों को 54 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम रहती है. इसके परिणामस्वरूप, उनके उत्पाद यहां सस्ते हो जाएंगे और स्थानीय बाज़ार में कीमतें गिर सकती हैं
पशुपालन क्षेत्र के बारे में उन्होंने कहा कि दूध की कीमतों में स्थिरता नहीं है, नकली दूध का व्यापार बढ़ रहा है और कई जगहों पर पशु संघों के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में अगर विदेशी दुग्ध उत्पादों को रियायतें दी जाती हैं, तो स्थानीय पशुपालन को और भी अधिक नुकसान हो सकता है.
अमेरिकी गायों को मांसाहारी चारा खिलाया जाता है और उनका दूध भारत में आता है, भाजपा सरकार ऐसा क्यों कर रही है? जो सात्विक हैं और मांसाहारी नहीं खाते, क्या भाजपा उन्हें मांसाहारी दूध पिलाएगी? अगर गुजरात में अभी आम आदमी पार्टी की सरकार होती, तो पशुपालकों को मौजूदा दाम से 15 रुपये प्रति लीटर अधिक मिलता. जब तक भाजपा सत्ता में रहेगी, हमारे किसान, पशुपालक और छोटे उद्योग पतन की ओर बढ़ते रहेंगे. सरकार को जवाब देना चाहिए कि अमेरिकी किसानों का दूध भारत में क्यों आ रहा है?
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार और निजी व्यापारी भी किसानों से समर्थन मूल्य पर फसल खरीदते हैं. जनता से अनुरोध करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अब तक किसानों और पशुपालकों को इसलिए नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि उन्होंने जाति और समुदाय के नेताओं को वोट दिया था. आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में, उन लोगों को वोट दें जो किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्योगपतियों के मुद्दों पर राजनीति करते हैं. (बृजेश दोशी की रिपोर्ट)
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