केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुदुचेरी के कराइक्कल में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के विरोध लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि इन समझौतों में किसानों और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर स्तर पर भारतीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है. बीजेपी की एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार भ्रम फैलाने की राजनीति कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि झूठ को जोर से बोलना, बार-बार दोहराना और उसे सच की तरह पेश करना राहुल गांधी की नीति बन गई है, लेकिन अब जनता इस राजनीति को पहचान चुकी है. गृह मंत्री ने कहा कि FTA और भारत-अमेरिका जैसे व्यापार समझौतों को बिना पढ़े किसानों और मछुआरों को डराया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि मौजूदा सरकार ने इन वर्गों को सौ फीसदी संरक्षण दिया है. उन्होंने यूपीए सरकार के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किसानों के हितों से समझौता किया गया था, जिसका खामियाजा आज भी देश भुगत रहा है.
इधर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि इस समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल उद्योग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा. राहुल गांधी ने कहा कि परिधान निर्यात पर ऊंचे टैरिफ और अमेरिकी कपास आयात से जुड़ी शर्तें भारत को कठिन स्थिति में डाल रही हैं.
राहुल गांधी ने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था में भारत में बने कपड़ों पर अमेरिका में अधिक शुल्क लगाया जा रहा है, जबकि बांग्लादेश जैसे देशों को शून्य शुल्क का लाभ मिल रहा है, जिसकी शर्त अमेरिकी कपास का आयात है. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर भारत भी इसी रास्ते पर चलता है तो घरेलू कपास किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है.
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि अगर अमेरिकी कपास का आयात नहीं किया गया तो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा और निर्यात प्रभावित होगा. इस कंफ्यूजन की स्थिति का सीधा असर लाखों किसानों, मजदूरों और टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े परिवारों पर पड़ेगा.
राहुल गांधी ने सरकार पर से सवाल किया कि इस तरह की शर्तों की जानकारी पहले सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और संसद में इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया गया. उन्होंने इसे नीति निर्माण में दूरदृष्टि की कमी करार दिया और कहा कि संतुलित समझौते से किसानों और उद्योग दोनों के हित सुरक्षित किए जा सकते थे. (पीटीआई)
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