किसान नेता गुरुनाम सिह चढूनी. (फाइल फोटो)हरियाणा में आलू किसानों की बकाया भावांतर भरपाई के पैसों को लेकर भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी (BKU-चढ़ूनी) ने प्रदेश सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. संगठन ने मांग की है कि किसानों के हिस्से की पूरी राशि तत्काल उनके बैंक खातों में पहुंचाई जाए. साथ ही चेतावनी दी है कि भुगतान में और देरी हुई तो किसान अपने हक के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने और बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे. किसान संगठन ने कहा कि इस साल आलू की कीमतें काफी नीचे रहने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. कई किसानों के लिए फसल का बाजार भाव इतना कम रहा कि उनकी उत्पादन लागत तक पूरी नहीं हो सकी. ऐसे में सरकार की भावांतर भरपाई योजना से मिलने वाली सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत है.
किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने भावांतर भरपाई योजना के तहत दो किस्तें जारी की थीं. संगठन का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान अभी तक योजना की पूरी सहायता राशि से वंचित हैं. कई महीने गुजरने के बाद भी किसानों को अपने खाते में भुगतान का इंतजार है.
भाकियू चढ़ूनी के अनुसार, आलू किसानों की भावांतर भरपाई के तहत करीब 90 करोड़ रुपये की राशि बकाया थी. संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से इस बकाया राशि में से कुछ भुगतान जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन कई किसानों के बैंक खातों में यह रकम अभी तक नहीं पहुंची है.
भाकियू चढ़ूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसान पहले से ही कम फसल भाव और बढ़ती खेती की लागत का दबाव झेल रहे हैं. डीजल, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि खर्च लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं. ऐसे हालात में सरकार की ओर से घोषित सहायता राशि का समय पर नहीं मिलना किसानों की परेशानी और बढ़ा रहा है.
संगठन ने सरकार से मांग की है कि बकाया भावांतर भरपाई जारी करने की स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक की जाए. जिन किसानों के लिए भुगतान मंजूर या जारी हो चुका है, उनके खातों में रकम बिना किसी और देरी के पहुंचाई जाए.
भाकियू चढ़ूनी ने साफ कहा है कि अगर किसानों की पूरी बकाया राशि जल्द जारी नहीं की गई तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा. किसानों को अपने अधिकारों के लिए बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी.
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