देश बचाओ मोर्चा की बैठक में शामिल हुए 150 किसान संगठनों के नेतादेश में एक बार फिर बड़े किसान आंदोलन की आहट तेज हो गई है. नई दिल्ली में गुरुद्वारा रकाबगंज के सभागार में मंगलवार को 150 से ज्यादा किसान संगठनों के नेताओं ने देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले रणनीतिक बैठक की. इसमें संयोजक समिति के सदस्यों गुरनाम सिंह चढ़ूनी, सरदार वी. एम. सिंह, शिवकुमार कक्का और सुरजीत सिंह फूल ने आगामी कार्यक्रम और आंदोलन की रणनीति पर अपने विचार रखे. बैठक में सभी संगठनों के बीच सात सूत्रीय मांगों पर संघर्ष करने को लेकर सहमति बनी है. मोर्चा ने देशभर में किसान महापंचायतों का आयोजन करने का भी फैसला लिया है. वहीं, देश बचाओ मोर्चा आखिरी में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी किसान महापंचायत आयोजित करेगा और आगे के आंदोलन की विस्तृत रणनीति का ऐलान करेगा.
बैठक में संयोजक समिति के सदस्य गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संघर्ष के सात सूत्रीय प्रस्ताव को पेश किया. इस प्रस्ताव को मौजूद किसान संगठनों के नेताओं ने सर्वसम्मति से पारित किया. इन सात मुद्दों में अमेरिका के साथ ट्रेड डील का विरोध, MSP की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष, किसानों की कर्जमाफी, भूजल संरक्षण, मुफ्त और समान शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष और बेरोजगारी का समाधान शामिल है.
मोर्चा ने प्रस्ताव में कहा कि वे अमेरिका के साथ हो रही ट्रेड डील में अब संशोधन नहीं चाहते और इस डील को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए. साथ ही किसानों के लिए MSP का मुद्दा आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बना रहेगा.
बैठक में किसानों नेताओं ने कर्जमाफी का मुद्दा भी उठाया गया. किसान संगठनों ने कहा कि जिस तरह बड़े उद्योगपतियों के कर्ज में राहत दी जाती है, उसी तरह किसानों के कर्ज भी माफ किए जाने चाहिए. इसके साथ ही बारिश के पानी के बेहतर इस्तेमाल और भूजल स्तर को लगातार नीचे जाने से रोकने के लिए भी संघर्ष करने का फैसला किया गया. किसान संगठनों ने कहा कि जल संरक्षण को गंभीरता से लागू करना जरूरी है.
देश बचाओ मोर्चा ने सात सूत्रीय प्रस्ताव में शिक्षा और स्वास्थ्य को भी शामिल किया है. किसान संगठनों ने मांग की है कि देश के सभी लोगों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था समान और मुफ्त होनी चाहिए. शिक्षा और स्वास्थ्य उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है. इसलिए इन दोनों क्षेत्रों में सभी लोगों को बराबर सुविधाएं मिलनी चाहिए.
देश बचाओ मोर्चा ने ऐलान किया है कि वह जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर भी संघर्ष करेगा. हालांकि, इस मामले में प्रदेश समितियों को अपने-अपने राज्यों के कानून और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आंदोलन की रणनीति तय करने की छूट दी गई है. देश बचाओ मोर्चा ने बेरोजगारी को भी सात सूत्रीय संघर्ष का प्रमुख मुद्दा बताया.
प्रस्ताव में कहा गया कि सरकार सभी इच्छुक लोगों को सरकारी रोजगार उपलब्ध कराए. अगर सरकार सभी को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती है, तो सरकारी नौकरी चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को देश की औसत आय की आधी राशि प्रतिमाह देने की व्यवस्था की जाए. मोर्चा ने कहा कि इस तरह की सिफारिश संसद की दीपक गोयल समिति ने वर्ष 2011 में भी की थी.
बैठक में देश बचाओ मोर्चा की पहल करने वाले लोगों की मौजूदा संयोजक समिति को भंग कर स्थायी समिति बनाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई. हालांकि, स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया गया है. संगठनों ने तय किया कि पहले देश के अलग-अलग राज्यों में किसान महापंचायतों का आयोजन किया जाएगा. इसके बाद स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
किसान संगठन राष्ट्रीय स्तर पर अंतिम महापंचायत कुरुक्षेत्र में 25 नवंबर 2026 को सर छोटूराम की जयंती के अवसर पर आयोजित करेंगे. हालांकि, संगठनों ने यह भी कहा कि अगर राज्यों में किसान महापंचायतों का सिलसिला नवंबर तक जारी रहता है तो राष्ट्रीय कार्यक्रम को 25 नवंबर के बाद आगे बढ़ाया जा सकता है. राष्ट्रीय महापंचायत में मोर्चा अपने अगले संघर्ष और आंदोलन की विस्तृत योजना का ऐलान करेगा.
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