लक्ष्मी नारायण सिंहमथुरा में आयोजित पंचायत आजतक के मंच पर उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह ने गन्ना किसानों, चीनी की उपलब्धता और एथेनॉल उत्पादन से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए. ‘गन्ना, गुड़, सियासत, चीनी’ सेशन में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 6 महीने की जरूरत के बराबर चीनी का स्टॉक मौजूद है. इसलिए लोगों को चीनी की कमी को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. मंत्री ने बातचीत के दौरान गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर भी सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि जिन चीनी मिलों में पहले किसानों को भुगतान के लिए दो-दो और तीन-तीन साल तक इंतजार करना पड़ता था, आज उन्हीं मिलों में भुगतान की स्थिति काफी बेहतर हो गई है.
चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का 94 फीसदी से ज्यादा भुगतान किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतिहास में गन्ना किसानों के भुगतान की स्थिति इससे बेहतर पहले कभी नहीं रही. मंत्री के मुताबिक, प्रदेश की करीब 70 चीनी मिलें ऐसी हैं, जो किसानों को 14 दिन के भीतर गन्ने का भुगतान कर रही हैं. वहीं, करीब 25 मिलों में किसानों को हर सप्ताह भुगतान किया जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ चीनी मिलें समय पर भुगतान नहीं कर पाई हैं, लेकिन पहले के मुकाबले अब स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है.
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि किसानों को उनके गन्ने का पैसा समय पर मिले, क्योंकि किसान के लिए फसल बेचने के बाद भुगतान का समय पर मिलना सबसे जरूरी है.
उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल लगातार बढ़ने को लेकर भी मंत्री से सवाल पूछा गया. इस पर उन्होंने कहा कि इसके पीछे गन्ने की रिकवरी में सुधार एक बड़ा कारण है. आसान भाषा में समझें तो गन्ने की रिकवरी का मतलब है कि गन्ने से कितनी मात्रा में चीनी निकल रही है. अगर कम गन्ने से ज्यादा चीनी बनने लगे तो मिलों और किसानों दोनों के लिए फायदा बढ़ता है. मंत्री ने बेहतर किस्म के गन्ने के बीज का जिक्र करते हुए कहा कि इसके इस्तेमाल से गन्ने की रिकवरी में सुधार हुआ है. रिकवरी बढ़ने से चीनी मिलों को फायदा हुआ और किसानों को भी समय पर भुगतान मिलने लगा. इससे किसानों का भरोसा बढ़ा और गन्ने की खेती का क्षेत्रफल भी बढ़ा.
गन्ना किसानों की एक बड़ी शिकायत हमेशा से गन्ने की तौल में होने वाली गड़बड़ी को लेकर रही है. मंत्री ने दावा किया कि सरकार ने घटतौली और गन्ना माफिया पर काफी हद तक लगाम लगाई है. उन्होंने कहा कि पहले एक ट्रॉली गन्ने की तौल में एक-दो क्विंटल और कभी-कभी तीन क्विंटल तक की घटतौली होने की शिकायतें आती थीं. लेकिन अब किसी भी चीनी मिल में एक किलो की भी घटतौली नहीं होने दी जा रही है. मंत्री के मुताबिक, तौल में पारदर्शिता बढ़ने से किसानों को उनकी फसल का सही वजन मिल रहा है और उन्हें अपने गन्ने की पूरी कीमत मिल पा रही है.
अपने क्षेत्र में चीनी मिल को लेकर चल रहे धरने के सवाल पर चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह ने इसे राजनीतिक मुद्दा बताया. उन्होंने दावा किया कि धरने में शामिल कई लोग स्थानीय नहीं हैं और कुछ लोग अलीगढ़ से भी आए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मथुरा का कोई पूर्व सैनिक इस धरने में शामिल नहीं है. मंत्री के मुताबिक, धरने में स्थानीय लोगों की संख्या भी बहुत ज्यादा नहीं रही. उन्होंने कहा कि महापंचायत का आह्वान किए जाने के बावजूद उम्मीद के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग वहां नहीं पहुंचे. मंत्री ने दावा किया कि मुख्यमंत्री और उनके द्वारा चीनी मिल शुरू किए जाने की घोषणा के बाद कुछ नेता भी धरने से वापस लौट गए.
जब मंत्री से पूछा गया कि क्या उनके खिलाफ कोई राजनीतिक साजिश की जा रही है, तो उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस तरह की राजनीति होती रहती है. उनका आरोप था कि राजनीतिक विरोधी इस तरह के मुद्दों को हवा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसानों और चीनी मिलों से जुड़े मुद्दों को राजनीति से ज्यादा विकास और किसानों के हित के नजरिए से देखना चाहिए.
गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के 24 से 48 घंटे में भुगतान के दावे पर भी मंत्री ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को गन्ने और किसानों के भुगतान की बात करने से पहले अपने शासनकाल को देखना चाहिए. मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन इटावा में गन्ने या एथेनॉल से जुड़ी कोई फैक्ट्री नहीं लगाई गई. उन्होंने छाता चीनी मिल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वर्ष 2002 से 2007 के बीच किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिला और भुगतान की समस्या के कारण ही मिल बंद हो गई. अखिलेश यादव के 24 से 48 घंटे में भुगतान के दावे पर तंज कसते हुए मंत्री ने कहा कि सपने देखना कोई बुरी बात नहीं है. कुछ लोग सपने दिन में देखते हैं और कुछ रात में.
एथेनॉल को लेकर चल रही बहस पर भी चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से पेट्रोल और डीजल जैसी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों से तेल खरीदता रहा है. ऐसे में एथेनॉल देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता है. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल में एथेनॉल के 38 नए प्लांट लगाए गए हैं. उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे ज्यादा एथेनॉल उत्पादन करने वाला राज्य है.
मंत्री ने कहा कि एथेनॉल को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की जरूरत नहीं है. उनका कहना है कि दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और अलग-अलग देशों के बीच तनाव के कारण लगातार बदलती रहती हैं. ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह ऊर्जा के दूसरे विकल्प भी मजबूत करे.
पंचायत आजतक के मंच से मंत्री ने एक तरफ गन्ना किसानों के भुगतान में सुधार का दावा किया, तो दूसरी तरफ चीनी की उपलब्धता को लेकर भी लोगों को भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब छह महीने का चीनी स्टॉक मौजूद है, इसलिए चीनी की कमी होने की संभावना नहीं है. वहीं, गन्ने की बेहतर रिकवरी, समय पर भुगतान, घटतौली पर रोक और एथेनॉल प्लांट बढ़ाने को उन्होंने गन्ना क्षेत्र में हुए बदलाव की अहम वजह बताया. अब देखना होगा कि सरकार के इन दावों का जमीन पर किसानों और चीनी उद्योग को कितना फायदा मिलता है.
ये भी पढ़ें:
बारिश ने बढ़ाई किसानों की टेंशन! यूपी के 23 जिलों में बाढ़, फसलें हो रहीं बर्बाद
'खेती में ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल, डैम की रेगुलर डिसिल्टिंग', जल संरक्षण पर PM मोदी ने दिए अहम सुझाव
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today