खेती पर फोकस, फंड की मांगकर्नाटक में कृषि और किसानों से जुड़े विकास को लेकर भी राज्य सरकार ने केंद्र से ज्यादा सहयोग की मांग की है. राज्य के बड़े सूखे क्षेत्रों में खेती और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति की जरूरत बताई गई है. इसी के साथ कर्नाटक के विकास और किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नीति आयोग से राज्य को केंद्रीय फंड में उसका उचित हिस्सा देने की मांग की. उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद बेहद जरूरी है.
डीके शिवकुमार ने कहा कि देश का विकास तभी संभव है, जब राज्यों का भी तेजी से विकास हो. उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी बताया. उनका कहना है कि संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों को एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए. उन्होंने नीति आयोग से कर्नाटक के विकास के लिए हर संभव मदद देने और राज्य की आर्थिक स्थिति व राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उसके योगदान को देखते हुए विशेष ध्यान देने की अपील की.
बैठक में शिवकुमार ने कर्नाटक की आर्थिक और विकास संबंधी उपलब्धियों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कर्नाटक देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है और GDP, प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास, तकनीक, इनोवेशन, विदेशी निवेश, निर्यात, स्टार्टअप और IT सेवाओं के क्षेत्र में राज्य का महत्वपूर्ण योगदान है. उन्होंने बताया कि कर्नाटक में हर साल करीब 1.6 लाख इंजीनियर और 13 हजार डॉक्टर तैयार होते हैं. वहीं, बेंगलुरु में करीब 26 लाख IT प्रोफेशनल काम कर रहे हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य देश की तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों में कितनी बड़ी भूमिका निभाता है.
डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु की बढ़ती आबादी को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए बेंगलुरु में आकर बस रहे हैं. इससे शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है और सड़कों, पानी, परिवहन और दूसरी सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है. नीति आयोग की ओर से कर्नाटक में एक ‘दूसरा बेंगलुरु’ विकसित करने का सुझाव दिया गया है. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेगी. इसके लिए एक विस्तृत योजना तैयार की जाएगी. साथ ही, दूसरे राज्यों में इस तरह की गई पहलों का भी अध्ययन किया जाएगा, ताकि कर्नाटक के लिए बेहतर मॉडल तैयार किया जा सके.
शिवकुमार ने केंद्र से मिलने वाले फंड के बंटवारे में आबादी को आधार बनाए जाने को लेकर भी अपनी चिंता सामने रखी. उन्होंने कहा कि जिन दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में अच्छा काम किया है, उन्हें इसका नुकसान नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि अगर केंद्रीय फंड का बंटवारा मुख्य रूप से आबादी के आधार पर किया जाता है, तो ऐसे राज्यों को नुकसान हो सकता है, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हाल में हुई बातचीत का भी जिक्र किया और कहा कि इस मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
बैठक के दौरान शिवकुमार ने राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे कई कार्यक्रमों की जानकारी भी दी. उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार हर साल पांच गारंटी योजनाओं पर 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर रही है. इसके अलावा किसानों को बिजली सब्सिडी देने पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने बेंगलुरु में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने, सरकारी स्कूलों के विकास, सरकारी सेवाओं को लोगों तक आसानी से पहुंचाने के लिए प्रजासेवा विभाग, विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित फॉरेन इन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट और पर्यटन को बढ़ावा देने से जुड़ी योजनाओं की भी जानकारी दी.
शिवकुमार ने राज्य में जमीन से जुड़े कामों को आसान बनाने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल करने के बाद Bhoomi Guarantee योजना शुरू की गई है. इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और सेवाओं को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाना है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है. कर्नाटक में तटीय पर्यटन नीति तैयार की गई है और इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाना है. इससे राज्य के समुद्री और तटीय इलाकों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
बैठक में अधिकारियों ने कर्नाटक की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े भी साझा किए. अधिकारियों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में कर्नाटक का सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP करीब 32.81 लाख करोड़ रुपये रहा. इस दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.1 प्रतिशत रही. कर्नाटक की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. राज्य के कुल GSDP में सेवा क्षेत्र का योगदान करीब 70 प्रतिशत है. इसके बाद उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत और कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है. इससे साफ है कि कर्नाटक की अर्थव्यवस्था में IT, टेक्नोलॉजी और दूसरी सेवाओं की बड़ी भूमिका है.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कर्नाटक के विकास की तारीफ की. उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य की प्रगति पर गर्व है. उन्होंने बेंगलुरु पर बढ़ते दबाव को कम करने की जरूरत को भी स्वीकार किया और कहा कि राज्य में दूसरा बेंगलुरु विकसित करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. लाहिड़ी ने यह भी कहा कि कर्नाटक में तेजी से विकास की काफी संभावनाएं हैं. उन्होंने राज्य के बड़े सूखे क्षेत्र यानी ड्राईलैंड को देखते हुए वहां कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति बनाने का सुझाव दिया. इससे कम बारिश वाले क्षेत्रों में खेती को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है. (नागार्जुन द्वारकानाथ की रिपोर्ट)
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