US ट्रेड डील और MSP पर घमासान: 21 जुलाई को दिल्ली में किसान महापंचायत, देशभर में आंदोलन का ऐलान

US ट्रेड डील और MSP पर घमासान: 21 जुलाई को दिल्ली में किसान महापंचायत, देशभर में आंदोलन का ऐलान

MSP, US-India ट्रेड डील और अन्य किसान मुद्दों को लेकर देशभर के किसान संगठनों ने 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर महापंचायत का ऐलान किया है. 150 से अधिक संगठनों के समर्थन के साथ 15 जुलाई को मोटरसाइकिल मार्च भी निकाला जाएगा. किसान नेता सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर सवाल उठा रहे हैं.

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US ट्रेड डील-MSP पर घमासान: 21 जुलाई को दिल्ली में किसान महापंचायत, देशभर में आंदोलन का ऐलानअमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ किसान करेंगे महापंचायत

देशभर के किसान संगठनों ने MSP, US-India ट्रेड डील और अन्य मुद्दों को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है. ‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय महापंचायत और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा. यह प्रदर्शन संसद सत्र के पहले दिन होगा, जिससे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति साफ नजर आ रही है.

किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इस आंदोलन में किसान, विद्यार्थी, समाजसेवी और अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि एक बड़ी कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें समाज के हर वर्ग को जोड़ा गया है. उन्होंने बताया कि देशभर के करीब 150 किसान संगठनों ने बैठक में भाग लेकर इस आंदोलन को समर्थन दिया है.

मोटरसाइकिल मार्च निकालेंगे किसान

आंदोलन की तैयारी के तहत 15 जुलाई को देशभर में मोटरसाइकिल मार्च निकाला जाएगा. इस दौरान किसान अपने-अपने क्षेत्रों में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ यह अलग-अलग फेज में आंदोलन का हिस्सा है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, गुरनाम सिंह चढ़ूनी और पूर्व जस्टिस बी. जे. कोलसे पाटिल ने संयुक्त रूप से सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. चढ़ूनी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता को गुमराह करने में माहिर है और अमेरिका के साथ होने वाले किसी भी व्यापार समझौते से देश के किसानों को नुकसान होगा.

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के दबाव में भारत की नीतियां प्रभावित हो रही हैं. रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी आपत्तियों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे "भारत की आर्थिक स्वतंत्रता पर सवाल" बताया. किसान नेताओं के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समझौते किसानों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. चढ़ूनी ने बताया कि चंडीगढ़ में हुई मीटिंग में देशभर से 75 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

किसान संगठनों की चेतावनी

चढ़ूनी ने कहा कि देश में समस्याएं बढ़ गई हैं जिसके खिलाफ किसान, मजदूर और समाजसेवी संगठन एकजुट होंगे और सरकार पर दबाव बनाएंगे. इसके लिए किसान संगठनों की अगुआई में एक बड़ा आंदोलन करने का ऐलान हुआ. इसके लिए एक मंच बनाया गया है जिसका नाम-देश बचाओ मोर्चा-रखा गया है. इस मोर्चे में किसान, मजदूर और समाजसेवा से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे. इस मोर्चा की जनरल बॉडी में हर संगठन का एक प्रतिनिधि शामिल होगा.

किसानों की मुख्य मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य मुद्दों का समाधान शामिल है. 21 जुलाई को प्रस्तावित महापंचायत को लेकर किसान संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

किसानों की मांगें

  • भारत–अमेरिका व्यापार समझौता तत्काल रद्द किया जाए.
  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2+50% फार्मूले पर सभी फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए.
  • किसानों की संपूर्ण कर्जमुक्ति सुनिश्चित की जाए.
  • जल संरक्षण, जल प्रबंधन और राष्ट्रीय जल नीति को प्रभावी ढंग से लागू कर देश के जल संकट का स्थायी समाधान किया जाए.
  • किसानों को उनकी उपज का लाभकारी और सुनिश्चित मूल्य दिया जाए 

इन मांगों को लेकर देश बचाओ मोर्चा ने घोषणा की कि 21 जुलाई 2026 को दिल्ली के किसान घाट पर एक दिवसीय विशाल देशव्यापी आंदोलन और जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से किसान, मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थी, युवा और अलग-अलग जनसंगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में भाग लेंगे.

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