ठाकुर गुणी प्रकाशभारत-अमेरिका संभावित व्यापार समझौते को लेकर कुछ किसान संगठनों और नेताओं की ओर से जताई जा रही आशंकाओं पर किसान नेता और एमएसपी कमेट के सदस्य ठाकुर गुणी प्रकाश ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि ट्रेड डील को लेकर किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है और इसे किसानों के हित के बजाय राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कृषि कानूनों के दौरान भी इसी तरह कुछ तथाकथित किसान नेताओं द्वारा किसानों के नुकसान की बात कही गई थी, जबकि असल जरूरत किसानों को बाजार, तकनीक और अधिक स्वतंत्रता देने की है.
किसान नेता ने कहा कि ट्रेड समझौते को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि इससे देश में खाद्यान्न संकट पैदा हो जाएगा और विदेशी कृषि उत्पाद भारतीय किसानों को नुकसान पहुंचाएंगे. उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि गेहूं और चावल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया जाएगा और इन पर किसी तरह की खुली व्यवस्था लागू नहीं होगी. इस तरह के मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को नुकसान होने की आशंका भी वास्तविकता से दूर है. उन्होंने कहा कि पशुपालन करने वाले किसानों के सामने आज चारा और अन्य लागत बड़ी चुनौती है. अगर वैश्विक बाजार से कुछ उत्पाद या संसाधन प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होते हैं तो इससे किसानों को राहत भी मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है.
किसान नेता ने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए बाजारों का विस्तार जरूरी है. उन्होंने हरियाणा के बासमती उत्पादक किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर अमेरिका निर्यात बाजार बंद कर दे तो इस स्थिति में किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है. उन्होंने तर्क दिया कि व्यापार और बाजार तक पहुंच किसी भी कृषि अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है और देशों के बीच लेनदेन विकास का आधार होता है.
उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर तकनीक, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि व्यवस्था की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी बीज सुधार, गुणवत्ता नियंत्रण या नई तकनीक की बात होती है तो कुछ संगठन उसका विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर भारत को कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ना है तो उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर देना होगा.
किसान नेता ने कहा कि किसानों को केवल MSP के दायरे में सोचने के बजाय बाजार आधारित अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि कई फसलों में खुले बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. सरकार की भूमिका नियामक होनी चाहिए और किसानों को अधिक व्यापारिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए.
अपने बयान में किसान नेता ने कुछ किसान संगठनों पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि किसानों को भावनात्मक मुद्दों से हटकर बाजार, तकनीक और निर्यात के अवसरों पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा था कि भारत को अपनी शर्तों पर व्यापारिक समझौते करने चाहिए और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए.
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