हंगामे से समझौते तक! पांचना बांध विवाद में देर रात बना फॉर्मूला, गुर्जर-मीणा में बनी सहमति

हंगामे से समझौते तक! पांचना बांध विवाद में देर रात बना फॉर्मूला, गुर्जर-मीणा में बनी सहमति

राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध के पानी के बंटवारे को लेकर गुर्जर और मीणा समाज के बीच वर्षों से जारी विवाद अब सुलझता नजर आ रहा है. जयपुर में हुई हाई लेवल बैठक में पहले तीखा विवाद हुआ और मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा बैठक छोड़कर बाहर निकल गए, लेकिन देर रात दोबारा बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई. समझौते के बाद लंबे समय से चले आ रहे इस सामाजिक और राजनीतिक विवाद के खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है.

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हंगामे से समझौते तक! पांचना बांध विवाद में देर रात बना फॉर्मूला, गुर्जर-मीणा में बनी सहमतिपांचना बांध का विवाद सुलझा

राजस्थान की राजनीति और सामाजिक समीकरणों से जुड़ा एक बड़ा विवाद आखिरकार सुलझता नजर आ रहा है. करौली के पांचना बांध के पानी के बंटवारे को लेकर गुर्जर और मीणा समाज के बीच चल रहा वर्षों पुराना टकराव मंगलवार को उस समय चरम पर पहुंच गया, जब समाधान के लिए बुलाई गई हाई लेवल बैठक में जमकर हंगामा हुआ. हालात ऐसे बने कि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपने ही समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक का बहिष्कार कर बीच में ही बाहर निकल गए. लेकिन देर रात घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि दोनों पक्षों के बीच आखिरकार सहमति बन गई.

दरअसल, जयपुर के शिक्षा संकुल में राजस्थान सरकार की ओर से गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की अहम बैठक आयोजित की गई. करीब पांच घंटे तक चली इस बैठक में कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम, दोनों समाजों के प्रतिनिधि और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सरकार का उद्देश्य साफ था करौली जिले के पांचना बांध के पानी के बंटवारे को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकालना. लेकिन बातचीत शुरू होते ही माहौल तनावपूर्ण हो गया.

बैठक से बाहर निकल गए कृषि मंत्री

बैठक के दौरान गुर्जर और मीणा समाज के प्रतिनिधि अपनी-अपनी मांगों पर अड़े रहे. कई दौर की तीखी बहस हुई, आरोप-प्रत्यारोप लगे और कई बार स्थिति इतनी गर्म हो गई कि प्रतिनिधि अपनी सीटों से उठकर विरोध जताने लगे. माहौल लगातार बिगड़ता गया और समाधान की उम्मीद धुंधली पड़ने लगी. इसी बीच सबसे बड़ा घटनाक्रम तब हुआ, जब कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपने समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक छोड़कर बाहर निकल गए. उनके बाहर जाने के बाद बैठक को समाप्त करना पड़ा. 

बाहर निकलते समय उन्होंने मीडिया से भी कोई बातचीत नहीं की. इस घटनाक्रम के बाद ऐसा लगने लगा कि एक बार फिर यह विवाद किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाएगा. लेकिन देर रात कहानी ने नया मोड़ लिया. बैठक से बाहर निकलने के कुछ घंटे बाद, रात करीब 10 बजे डॉ. किरोड़ी लाल मीणा फिर से शिक्षा संकुल के माधव सभागार पहुंचे. यहां उन्होंने जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम के साथ विस्तृत चर्चा की. इसके बाद तीनों मंत्रियों ने गुर्जर और मीणा समाज के किसान प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बातचीत शुरू की.

देर रात बनी सहमति

कई दौर की वार्ता के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच आम सहमति बन गई. देर रात हुई इस हाई लेवल बैठक में दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए और वर्षों से चले आ रहे पांचना बांध विवाद को सुलझाने पर सहमति जताई. इस समझौते के बाद दोनों समुदायों के लोगों ने राहत की सांस ली. वहीं, राजस्थान सरकार के लिए भी यह बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि यह विवाद लंबे समय से सामाजिक तनाव और राजनीतिक चुनौती का कारण बना हुआ था. 

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि समझौते के बाद तय किए गए बिंदुओं को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है. अगर सहमति के अनुसार पानी का बंटवारा और अन्य फैसले प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो यह वर्षों पुराने विवाद का स्थायी समाधान साबित हो सकता है. लेकिन यदि समझौते के पालन में किसी तरह की देरी या मतभेद सामने आते हैं, तो यह मामला एक बार फिर विवाद का रूप ले सकता है. फिलहाल, देर रात बनी इस सहमति ने सरकार, प्रशासन और दोनों समुदायों के लिए राहत की उम्मीद जरूर जगा दी है.(विशाल शर्मा की रिपोर्ट)

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