रोहित पवारमहाराष्ट्र में कृषि कर्जमाफी योजना को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार की कर्ज माफी योजना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसमें कई ऐसी शर्तें हैं, जिनसे बड़ी संख्या में किसान इस योजना के लाभ से वंचित रह सकते हैं. उन्होंने दावा किया कि योजना की मौजूदा व्यवस्था से राज्य के करीब 70 फीसदी किसानों के साथ अन्याय हो सकता है.
नांदेड़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रोहित पवार ने कहा कि सरकार ने किसानों की कर्ज माफी को लेकर जो वादा किया था, उसे पूरा करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 29 जून से छत्रपति संभाजीनगर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा.
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने 2 जून को 36,585 करोड़ रुपये की कृषि कर्जमाफी योजना को मंजूरी दी थी. इस योजना से करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है. इसके तहत किसानों का 2 लाख रुपये तक का कृषि लोन माफ करने का प्रावधान है. योजना को तीन हिस्सों में बांटा गया है. इसमें कर्ज माफी, एकमुश्त निपटान (OTS) और प्रोत्साहन लाभ शामिल हैं. सरकार के अनुसार, योजना में जमीन के मालिकाना हक को पात्रता की अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया है.
योजना के तहत वे किसान कर्जमाफी के पात्र होंगे, जिनका अल्पकालीन फसल लोन मूलधन और ब्याज सहित 2 लाख रुपये तक है. यह कर्ज 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 के बीच लिया गया होना चाहिए और 30 सितंबर 2025 तक बकाया होना चाहिए. इसके अलावा 31 मार्च 2026 तक भुगतान नहीं किए गए कर्ज को ही इसमें शामिल किया जाएगा.
रोहित पवार इससे पहले भी इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं. उन्होंने सोलापुर जिले के पंढरपुर में कर्जमाफी योजना से जुड़ी शर्तों को हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी. हालांकि, सरकार की ओर से चर्चा का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने आंदोलन खत्म कर दिया था. अब एक बार फिर उन्होंने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की तैयारी शुरू करने की बात कही है. उनका कहना है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें.
कृषि कर्जमाफी को लेकर महाराष्ट्र में अब सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमा सकता है. किसानों की मांगों और सरकार की योजना के बीच चल रहा यह विवाद अब आंदोलन का रूप लेने की तैयारी में है. बता दें कि मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले सोमवार को विपक्षी दलों ने विधानसभा परिसर की सीढ़ियों पर प्रदर्शन कर राज्य सरकार के खिलाफ आवाज उठाई. विपक्ष ने मांग की कि किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए और कर्जमाफी योजना में लगाई गई शर्तों को हटाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिल सके.
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