किसान की मौत पर मुआवजे की मांग, 27 जुलाई को 500 ट्रैक्टरों की रैली का ऐलान

किसान की मौत पर मुआवजे की मांग, 27 जुलाई को 500 ट्रैक्टरों की रैली का ऐलान

राजस्थान के ब्यावर जिले में किसान आनंद की मौत के बाद किसान महापंचायत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है. संगठन ने भारतमाला परियोजना को मौत का कारण बताते हुए इसे रद्द करने और किसानों से जल्द वार्ता शुरू करने की अपील की है. साथ ही 500 ट्रैक्टरों की रैली की चेतावनी भी दी गई है.

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किसान की मौत पर मुआवजे की मांग, 27 जुलाई को 500 ट्रैक्टरों की रैली का ऐलानकिसानों की ट्रैक्टर रैली (सांकेतिक फोटो)

राजस्थान के ब्यावर जिले के नयागांव के किसान आनंद की मौत के बाद उनका परिवार गहरे संकट में आ गया है. किसान महापंचायत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर मांग की है कि मृतक किसान के परिवार को जल्द आर्थिक सहायता दी जाए. संगठन का कहना है कि भारतमाला परियोजना और कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कारण किसान मानसिक तनाव में था, जिसकी वजह से उसने अपनी जान गंवा दी. ऐसे में सरकार को इस परिवार की जिम्मेदारी उठानी चाहिए.

छोटे बच्चों और बुजुर्ग दादी के सहारे चल रहा परिवार

किसान महापंचायत के अनुसार आनंद ब्यावर जिले की मसूदा तहसील के नयागांव स्थित डांग की ढाणी के रहने वाले थे. उनके परिवार में चार बेटियां, दो बेटे और करीब 75 साल की बुजुर्ग मां हैं. बड़ी दो बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि दो छोटी बेटियां अभी छह से आठ साल की हैं. बड़ा बेटा मानसिक रूप से दिव्यांग बताया गया है और छोटा बेटा अभी केवल 10 साल का है. आनंद की पहली पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था और दूसरी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई. ऐसे में परिवार में कमाने वाला अब कोई नहीं बचा है.

परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट

पत्र में बताया गया है कि आनंद के हिस्से में केवल दो बीघा जमीन थी. उसी खेती से परिवार का खर्च चलता था. अब किसान की मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. गांव के लोग अपनी ओर से मदद कर रहे हैं, लेकिन इतनी सहायता परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है.

सरकार से मदद नहीं मिलने का आरोप

किसान महापंचायत ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद न तो क्षेत्र के विधायक और न ही सांसद परिवार से मिलने पहुंचे. अंतिम संस्कार के समय उपखंड अधिकारी जरूर मौके पर पहुंचीं, लेकिन उन्होंने किसी आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की. अधिकारियों ने केवल पालनहार योजना और भविष्य में बेटियों की शादी के समय सरकारी सहायता मिलने का भरोसा दिया. संगठन का कहना है कि इस समय परिवार को तुरंत आर्थिक मदद की जरूरत है, जबकि भविष्य की योजनाओं से मौजूदा समस्या का समाधान नहीं होगा.

महापंचायत ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन ने यह कहकर मदद देने से इनकार कर दिया कि यह आत्महत्या का मामला है और ऐसे मामलों में सहायता का कोई प्रावधान नहीं है. संगठन का दावा है कि पहले भी ऐसे कई मामलों में सरकार ने आर्थिक सहायता दी है.

परियोजना से मानसिक तनाव में था किसान

किसान महापंचायत का कहना है कि भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण आनंद लंबे समय से मानसिक तनाव में थे. संगठन का आरोप है कि इसी तनाव के कारण उन्होंने अपनी जान गंवाई. इसलिए सरकार को मृतक किसान के परिवार को उचित आर्थिक सहायता देनी चाहिए.

गांव वालों ने परियोजना पर भी उठाए सवाल

पत्र में भारतमाला परियोजना और कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का भी विरोध किया गया है. किसानों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क गांव की जमीन से करीब 15 फीट ऊंचाई पर बनेगी. इससे गांव दो हिस्सों में बंट जाएगा और लोगों का आपसी संपर्क प्रभावित होगा. खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा, पशुओं के लिए चारा लाना कठिन होगा और स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा.

किसानों का यह भी कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा. साथ ही वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रदूषण भी बढ़ेगा.

करीब एक साल से जारी है किसानों का विरोध

किसान महापंचायत के अनुसार सितंबर 2025 से किसान लगातार इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं. इस दौरान गांवों में सभाएं हुईं, तिरंगा चेतना यात्राएं निकाली गईं, ट्रैक्टर रैलियां आयोजित की गईं, धरने दिए गए और मौन जुलूस भी निकाले गए. किसानों का कहना है कि उन्होंने हर सरकारी बैठक में अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया.

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा परियोजना के समर्थन में आयोजित बैठकों में प्रभावित किसानों को नहीं बुलाया गया. किसानों ने सरकार को परियोजना के फायदे और नुकसान पर खुली बहस करने की चुनौती भी दी है.

27 जुलाई को 500 ट्रैक्टरों की रैली की चेतावनी

किसान महापंचायत ने घोषणा की है कि 27 जुलाई 2026 को चौमू से लगभग 500 ट्रैक्टरों की रैली निकाली जाएगी. यदि सरकार ने उससे पहले कोई सकारात्मक पहल नहीं की, तो किसान जयपुर की ओर कूच करेंगे. संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार के साथ बातचीत कर समाधान निकालना है.

मुख्यमंत्री से की दो बड़ी मांगें

किसान महापंचायत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की है कि सबसे पहले मृतक किसान आनंद के परिवार को तुरंत पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उनके बच्चों और बुजुर्ग मां का जीवन सुरक्षित हो सके. इसके साथ ही संगठन ने मांग की है कि भारतमाला परियोजना और किशनगढ़-कोटपूतली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर किसानों से मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत शुरू की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य किसान के साथ ऐसी दुखद घटना न हो.

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