Crop Insurance: बदलते मौसम की मार से हिफ़ाजत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक मज़बूत कदम

Crop Insurance: बदलते मौसम की मार से हिफ़ाजत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक मज़बूत कदम

आजकल मौसम का कोई भरोसा नहीं हैकभी बेमौसम बारिश हो जाती है तो कभी सूखा पड़ जाता है. ऐसे मुश्किल वक्त में 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए एक मजबूत ढाल का काम करती है.खरीफ फसलों का बीमा कराने की आखिरी तारीख आमतौर पर 31 जुलाई होती है. इस योजना में बीमे की रकम जिले के तय मानकों के हिसाब से मिलती है, ताकि किसानों के नुकसान की पूरी भरपाई हो सके.स बीमा योजना से किसान कर्ज़ के जाल में फंसने से बचते हैं

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Crop Insurance: बदलते मौसम की मार से हिफ़ाजत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक मज़बूत कदमप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

 
आज के दौर में मौसम का मिज़ाज जिस तेज़ी से बदल रहा है, उसने हमारे किसानों की मेहनत और खेती को बहुत बड़े जोखिम में डाल दिया है. कभी अचानक भारी बारिश, कभी सूखा तो कभी ओलावृष्टि से तैयार फसलें तबाह हो जाती हैं. ऐसे कुदरती हादसों और जलवायु परिवर्तन के खतरों से किसानों को माली सुरक्षा देने के लिए भारत सरकार 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) चला रही है. यह योजना मुख्य रूप से 'क्षेत्रगत दृष्टिकोण' यानी एरिया अप्रोच के आधार पर काम करती है. इसका मतलब यह है कि किसी खास इलाके में बीमित फसल की पैदावार में आई कमी का अंदाजा राज्य सरकार द्वारा कराए गए फसल कटाई प्रयोगों और यस-टेक की रिमोट सेंसिंग तकनीक से लगाया जाता है. जब वास्तविक पैदावार तय सीमा से कम पाई जाती है, तो पूरे क्षेत्र के किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाता है. इस बेहतरीन व्यवस्था का मकसद किसानों की आय को स्थिर रखना और उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का हौसला देना है ताकि कठिन हालात में भी खेती जारी रह सके.

 खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तारीख 

किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि खरीफ फसलों के लिए बीमा कराने की आखिरी तारीख आमतौर पर 31 जुलाई तय की गई है. किसानों पर आर्थिक बोझ कम से कम पड़े, इसके लिए सरकार ने प्रीमियम की दरें बहुत ही किफ़ायती रखी हैं  योजना का लाभ लेने के लिए ज़मीन के कागज़ , बैंक पासबुक, पहचान पत्र और फसल बुवाई का प्रमाण पत्र देना ज़रूरी है इसके खरीफ मौसम की खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए किसानों को कुल बीमा राशि का केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि कमर्शियल या बागवानी फसलों के लिए यह दर 5% है. बाकी का बचा हुआ प्रीमियम सरकार सब्सिडी के तौर पर खुद वहन करती है, जिसे केंद्र और राज्य सरकारें आपस में आधा-आधा बांटती हैं. योजना को मजबूत बनाने के लिए खरीफ 2024 से नियम बनाया गया है कि अगर बीमा कंपनी दावे का भुगतान समय पर नहीं करती, तो उस पर 12% सालाना जुर्माना लगाया जाएगा. इतना ही नहीं, राज्य सरकारों द्वारा सब्सिडी में देरी करने पर भी 12% ब्याज वसूलने और एस्क्रो अकाउंट खोलने की व्यवस्था की गई है ताकि किसानों का हक न रुके.

फसल नुकसान होने पर क्लेम तरीका

अगर ओलावृष्टि, जलभराव, भूस्खलन, बादल फटने या कटाई के बाद बेमौसम बारिश से आपकी फसल खराब हो जाती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. ऐसे स्थानीय नुकसान के मामलों में व्यक्तिगत खेत के आधार पर क्लेम का आकलन किया जाता है. इसके लिए किसान को नुकसान होने के 48 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होती है. यह सूचना आप टोल-फ्री नंबर, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल , क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप  संबंधित बैंक शाखा या स्थानीय कृषि अधिकारी के जरिए दे सकते हैं. सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार और बीमा कंपनी के नुमाइंदों की एक संयुक्त समिति 10 दिनों के भीतर खेत का मुआयना करती है. नुकसान का सही अंदाजा लगाने के बाद दावे की रकम सीधे किसान के बैंक खाते में बिना किसी बिचौलिए के इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेज दी जाती है. 48 घंटे के अंदर सही जानकारी देना ही क्लेम हासिल करने की सबसे अहम शर्त है.

आधुनिक टेक्नोलॉजी से पारदर्शी तेज क्लेम निपटान

फसल बीमा की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, असरदार और तेज़ बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. 'डिजिक्लेम मॉड्यूल' की शुरुआत से राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल को सीधे पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम  से जोड़ दिया गया है, जिससे क्लेम का पैसा सीधा किसान के खाते में पहुंचता है. इसके अलावा फसल कटाई के आंकड़े जमा करने के लिए 'CCE Agri-App' और व्यक्तिगत खेतों में स्थानीय आपदाओं से हुए नुकसान के सटीक आकलन के लिए 'CLAP' (Crop Loss Assessment App) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है. रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट और यस-टेक (YES-TECH) जैसी उन्नत तकनीकों की मदद से पैदावार का सही अनुमान लगाया जाता है, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश खत्म हो जाती है और किसानों को उनकी मेहनत का वाजिब हक बिना किसी रुकावट के सही वक्त पर मिल जाता है.

 सरकारी राहत कोष और फसल बीमा में मुख्य अंतर

अक्सर किसान फसल बीमा और सरकारी आपदा राहत सहायता के बीच उलझ जाते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं. राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत राहत राशि केवल तभी दी जाती है जब किसी कुदरती आफत से फसल का नुकसान 33% या उससे ज्यादा हुआ हो. इसके लिए राजस्व और कृषि विभाग के अफसर संयुक्त सर्वे करते हैं और यह केवल आपातकालीन राहत (इनपुट सब्सिडी) होती है, जो पूरे जिले या खास आपदा ग्रस्त क्षेत्र के लिए घोषित की जाती है. दूसरी तरफ, PMFBY एक बीमा सुरक्षा है जो किसान द्वारा बोई गई पूरी फसल की लागत और उत्पादन में आई कमी की भरपाई करती है. इसलिए SDRF की राहत राशि की तुलना फसल बीमा के क्लेम से नहीं की जा सकती. दोनों योजनाओं की समझ रखकर किसान संकट के वक्त अपने अधिकारों का पूरा फायदा उठा सकते हैं.

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